भैरवनाथ ही नहीं, इस खास मंदिर के दर्शन बिना भी अधूरी मानी जाती है वैष्णो देवी की यात्रा, यहां हर देवी-देवता का है वास
Shiv Khori Cave: जब भी वैष्णो देवी यात्रा की बात होती है, ज्यादातर लोग मां के दर्शन कर वापस लौट आते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस पवित्र यात्रा के आसपास एक ऐसा स्थान भी मौजूद है, जो आध्यात्मिक अनुभव को कई गुना बढ़ा देता है. यह जगह है शिवखोड़ी, जो वैष्णो देवी से करीब दो घंटे की दूरी पर स्थित है. शिवखोड़ी सिर्फ एक गुफा नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जिसे देखने से ज्यादा महसूस किया जाता है. यहां पहुंचते ही माहौल में एक अलग ही शांति और ऊर्जा महसूस होती है. गुफा के अंदर दीवारों पर त्रिशूल के निशान, प्राकृतिक रूप से गिरता दूध और रोशनी से भरा एक रहस्यमयी रास्ता-ये सब चीजें इसे खास बनाती हैं. मान्यता है कि भगवान शिव यहां कुछ समय के लिए रुके थे और बाद में यही रास्ता कई देवी-देवताओं के आने-जाने का मार्ग बना. यही वजह है कि शिवखोड़ी को सिर्फ धार्मिक जगह नहीं, बल्कि एक जीवित कथा माना जाता है, जो आज भी भक्तों को अपनी ओर खींचती है.
शिवखोड़ी क्या है और कहां स्थित है
शिवखोड़ी जम्मू क्षेत्र में स्थित एक प्राकृतिक गुफा है, जो वैष्णो देवी से करीब 2 घंटे की दूरी पर पड़ती है. यह गुफा पहाड़ के अंदर बनी हुई है और इसका रास्ता थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन श्रद्धा और विश्वास के साथ चलने पर यह यात्रा आसान लगने लगती है. यह जगह खास तौर पर उन लोगों के लिए मानी जाती है जो वैष्णो देवी यात्रा को पूरा मानते हैं. कई श्रद्धालु मानते हैं कि जब तक शिवखोड़ी के दर्शन न हों, तब तक वैष्णो देवी यात्रा अधूरी रहती है.
गुफा के अंदर दिखने वाले चमत्कारी निशान
-जैसे ही आप शिवखोड़ी गुफा के अंदर प्रवेश करते हैं, सबसे पहले जो चीज ध्यान खींचती है, वो हैं दीवारों पर बने त्रिशूल जैसे कटे हुए निशान. ये निशान इंसानी हाथों से नहीं बने हुए लगते, बल्कि प्राकृतिक रूप से उभरे हुए दिखाई देते हैं.
-आगे बढ़ने पर एक जगह ऐसी आती है जहां पहाड़ से लगातार दूध की धार गिरती रहती है. हैरानी की बात यह है कि यह दूध कभी बंद नहीं होता. श्रद्धालु इसे भगवान शिव का आशीर्वाद मानते हैं और इसे देखकर मन अपने आप शांत हो जाता है.
स्वर्ग का रास्ता और अमरनाथ से जुड़ा रहस्य
-गुफा के अंदर एक स्थान ऐसा भी बताया जाता है जहां से रोशनी आती दिखाई देती है. मान्यता है कि यही स्वर्ग की ओर जाने वाला रास्ता है. यह जगह ज्यादा देर तक देखने पर एक अलग ही अनुभूति देती है.
-कई लोगों का कहना है कि गुफा के आगे का हिस्सा सीधे अमरनाथ से जुड़ता है. कहा जाता है कि एक बाबा इस रास्ते से अमरनाथ तक गए भी थे. हालांकि यह बात रहस्य बनी हुई है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था इस मान्यता को आज भी जीवित रखे हुए है.
भगवान शिव और भस्मासुर की कथा से जुड़ी मान्यता
लोक कथाओं के अनुसार, जब भस्मासुर का अंत हुआ और भगवान शिव उस घटना से दुखी हो गए, तब उन्हें मनाने के लिए सभी देवी-देवता इसी रास्ते से ऊपर से आए थे. भगवान विष्णु ने बाहर भस्मासुर का अंत करवाया और उसके बाद भगवान शिव यहां आकर रुके थे. इसी वजह से शिवखोड़ी में कई देवी-देवताओं के निशान देखने को मिलते हैं. यहां शिवलिंग, नाग, त्रिशूल और अन्य दिव्य चिन्ह प्राकृतिक रूप से बने हुए दिखाई देते हैं.
क्यों खास है शिवखोड़ी की यात्रा
शिवखोड़ी की यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं है. यह जगह इंसान को अंदर से जोड़ती है. यहां आने वाले कई लोग बताते हैं कि गुफा के अंदर जाते ही डर, तनाव और नकारात्मक सोच अपने आप कम हो जाती है.
जो लोग आध्यात्मिक शांति चाहते हैं या जीवन में किसी मोड़ पर मार्गदर्शन की तलाश में हैं, उनके लिए शिवखोड़ी एक गहरा अनुभव बन सकती है.

वैष्णो देवी जाएं तो शिवखोड़ी क्यों जरूर जाएं
अगर आप वैष्णो देवी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो शिवखोड़ी को नजरअंदाज न करें. सिर्फ दो घंटे की दूरी पर स्थित यह जगह आपकी पूरी यात्रा को एक नया मतलब दे सकती है.
यहां आकर सिर्फ भगवान शिव के दर्शन नहीं होते, बल्कि एक ऐसी ऊर्जा का अनुभव होता है जो लंबे समय तक मन और सोच पर असर छोड़ती है.


