Crying During Prayer: पूजा के दौरान रोना क्या दर्शाता है? पंडित जी से जानिए क्यों होता है ऐसा?
Crying During Prayer: भगवान की भक्ति में भावनाएं अक्सर हमारे दिल को बहुत गहराई से छू जाती हैं. कभी-कभी पूजा करते समय अचानक आंखों में आंसू आ जाते हैं और लोग डर जाते हैं कि कहीं यह पाप का संकेत तो नहीं, लेकिन सच यह है कि हर आंसू पाप की निशानी नहीं होता. कुछ आंसू हमारे अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने का जरिया होते हैं, तो कुछ सीधे भगवान के प्रति हमारे असीम प्रेम का परिणाम होते हैं, अगर आप सोच रहे हैं कि पूजा के दौरान रोना सही है या गलत, तो जानना जरूरी है कि यह आंसू किस वजह से आ रहे हैं. क्या आपके शरीर में बेचैनी और दर्द महसूस हो रहा है, या दिल बस प्रभु की याद में भर आया है? समझना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही जानकारी होने पर आप अपनी भक्ति को और भी सच्चाई और शांति के साथ महसूस कर पाएंगे. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
पूजा में आंसू क्यों आते हैं?
जब हम भगवान की पूजा करते हैं, तो हमारी आत्मा और मन दोनों गहराई से सक्रिय होते हैं. इस समय हमारी भावनाएं इतनी मजबूत हो जाती हैं कि रोना स्वाभाविक हो जाता है. आमतौर पर पूजा में रोने के दो कारण होते हैं:
1. नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव:
कभी-कभी हमारे आसपास या शरीर में ऐसी ऊर्जा होती है जो हमें कमजोर या परेशान करती है. इस ऊर्जा का असर हमारे भावनाओं पर भी पड़ता है, अगर पूजा के दौरान आपको ऐसा महसूस होता है कि शरीर भारी या असहज है, मांसपेशियों में दर्द या बेचैनी हो रही है, तो यह संकेत है कि नकारात्मक ऊर्जा आपके अंदर सक्रिय है.
2. भगवान के प्रति अति प्रेम:
दूसरी वजह बिल्कुल अलग और बहुत सुंदर होती है, अगर रोते समय दिल में खुशी, श्रद्धा और भगवान के प्रति प्रेम महसूस हो रहा है, तो यह आपके सच्चे भावों का प्रतीक है. ऐसे आंसू भावनाओं का स्वाभाविक बहाव हैं और इन्हें रोकने की जरूरत नहीं होती.
नकारात्मक ऊर्जा और प्रेम के आंसू कैसे पहचानें?
-शरीर की प्रतिक्रिया देखें: अगर पूजा के दौरान रोते समय शरीर में दर्द, बेचैनी या हल्की मारतोड़ महसूस हो रही है, तो यह नकारात्मक ऊर्जा का संकेत है.
-दिल की स्थिति महसूस करें: अगर आंसू भगवान की याद में आ रहे हैं, दिल खुश और हल्का महसूस कर रहा है, तो यह प्रेम का प्रतीक है.
इस तरह के संकेत जानने से आप यह समझ सकते हैं कि आपकी भक्ति सकारात्मक है या आपको थोड़ी सावधानी रखने की जरूरत है.
पूजा के समय भावनाओं को नियंत्रित कैसे करें
1. धीरे-धीरे सांस लें: गहरी सांस लेने से शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और नकारात्मक प्रभाव कम होता है.
2. भगवान के नाम का स्मरण: मन को शांत करने और प्रेम बढ़ाने के लिए भगवान के नाम या मंत्र का जप करें.
3. सकारात्मक वातावरण बनाएं: पूजा का स्थान साफ-सुथरा, हल्की रोशनी और अगर संभव हो तो धूप या घी का दीपक रखें.
4. भावनाओं को दबाएं नहीं: अगर आंसू प्रेम के कारण हैं तो उन्हें महसूस करें. यही भक्ति की सच्ची भावना है.

भगवान के प्रति सच्चा प्रेम
आंसू भगवान के प्रति आपके प्रेम का सबसे सुंदर रूप होते हैं. यह दिखाता है कि आप अपने मन से प्रभु के करीब हैं. ऐसे आंसू रोकने की कोशिश न करें. भावनाओं के साथ जुड़ना आपकी भक्ति को और मजबूत बनाता है.


