Juban Par Kab Baitti hai Saraswati: किस समय जुबान पर बैठती हैं मां सरस्वती? जानें शास्त्रों की वाणी से जुड़ी जरूरी बातें

Juban Par Kab Baitti hai Saraswati: किस समय जुबान पर बैठती हैं मां सरस्वती? जानें शास्त्रों की वाणी से जुड़ी जरूरी बातें

Power Of Bhrahma Muhurta Words: हम सबने बचपन से बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना है कि सुबह-सुबह कुछ भी बोलने से पहले सोच लो, क्योंकि उस वक्त कही गई बात असर दिखाती है. कई लोग इसे बस एक कहावत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हिंदू शास्त्रों में इस सोच के पीछे एक गहरी मान्यता जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि दिन के 24 घंटे में एक खास समय ऐसा होता है, जब मां सरस्वती खुद इंसान की जुबान पर आकर बैठती हैं. उस दौरान बोली गई बात सिर्फ शब्द नहीं रहती, बल्कि सच बनने की ताकत रखती है. इसी खास समय को ब्रह्म मुहूर्त कहा गया है, जिसे शास्त्रों में सबसे पवित्र और शुभ माना गया है. यह वक्त सुबह करीब 3 बजे के बाद से सूरज निकलने से पहले तक का होता है. मान्यता है कि इस दौरान इंसान का मन शांत होता है, सोच साफ रहती है और बोली में जबरदस्त असर होता है. इसलिए इस समय कही गई बात का असर खुद पर ही नहीं, बल्कि दूसरों पर भी पड़ता है. इसी वजह से वाणी को लेकर खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है?
हिंदू धर्म में दिन के हर पहर का अपना अलग महत्व बताया गया है. इनमें ब्रह्म मुहूर्त को सबसे खास माना गया है. आम तौर पर यह समय सुबह करीब 3:30 बजे से लेकर सूर्योदय से पहले तक का होता है. शास्त्रों के मुताबिक यह वह वक्त होता है जब माहौल में शांति होती है, चारों तरफ सन्नाटा रहता है और इंसान का दिमाग सबसे ज्यादा स्थिर रहता है. इसी समय साधु-संत ध्यान, जाप और साधना करते हैं. कहा जाता है कि इस वक्त की गई पूजा और मंत्र जाप जल्दी फल देता है, क्योंकि मन भटकता नहीं और ध्यान आसानी से टिक जाता है.

जुबान पर मां सरस्वती के वास की मान्यता
-शास्त्रों में एक दिलचस्प बात कही गई है कि 24 घंटे में एक बार मां सरस्वती हर व्यक्ति की जुबान पर आकर बैठती हैं. मान्यता के अनुसार यह समय सुबह करीब 3:20 से 3:40 के बीच का माना गया है. इस दौरान जो भी इंसान बोलता है, उसकी बात सच होने की संभावना बढ़ जाती है.

-यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग इस समय गलत, कड़वी या नकारात्मक बात बोलने से मना करते हैं. उनका कहना होता है कि अगर इस वक्त मुंह से गलत शब्द निकल गए, तो उसका असर देर तक देखने को मिल सकता है.

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सुबह की वाणी इतनी असरदार क्यों मानी जाती है?
-इस मान्यता के पीछे सिर्फ धार्मिक सोच ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक वजह भी छिपी है. सुबह नींद से उठने के बाद दिमाग बोझिल नहीं होता. मन में दिनभर की उलझनें और तनाव नहीं होते. ऐसे में इंसान जो भी सोचता और बोलता है, वह दिल से निकलता है.

-यही वजह है कि सुबह कही गई बात मन में गहराई से बैठ जाती है, अगर इंसान इस वक्त खुद को कमजोर, बदकिस्मत या बेकार कहता है, तो धीरे-धीरे वही सोच उसकी आदत बन जाती है. वहीं अगर सुबह अच्छे शब्द बोले जाएं, तो मन में भरोसा और सकारात्मक सोच पैदा होती है.

कटु वाणी से क्यों बचने की सलाह दी गई है?
-शास्त्रों में साफ कहा गया है कि वाणी में कटुता नहीं होनी चाहिए, खासकर ब्रह्म मुहूर्त के समय. इसकी वजह यह है कि उस वक्त कही गई बात सिर्फ सुनने वाले को ही नहीं, बोलने वाले को भी नुकसान पहुंचा सकती है.

-अगर इंसान गुस्से में खुद को या किसी और को बुरा कह देता है, तो वह बात उसके मन में घर कर जाती है. बाद में वही सोच व्यवहार में दिखने लगती है. इसलिए सुबह के समय शांत रहना, कम बोलना और सोच-समझकर शब्द चुनना बेहतर माना गया है.

इस समय क्या बोलना और क्या नहीं?
-ब्रह्म मुहूर्त में कोशिश करनी चाहिए कि मुंह से अच्छे और साफ शब्द ही निकलें. इस वक्त भगवान का नाम लेना, खुद के लिए अच्छे शब्द कहना और दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करना फायदेमंद माना गया है.

-वहीं झगड़े की बात, किसी को कोसना, खुद को कमजोर कहना या नकारात्मक बातें बोलना नुकसानदेह हो सकता है. कई लोग इस समय चुप रहना भी बेहतर मानते हैं, ताकि गलती से भी गलत शब्द न निकलें.

Brahma Muhurta meaning

आज के समय में इस मान्यता की सीख
भले ही हर कोई इन बातों को शास्त्रों की मान्यता मानकर न माने, लेकिन इसमें छिपी सीख आज भी उतनी ही काम की है. दिन की शुरुआत अगर अच्छे शब्दों और अच्छी सोच से की जाए, तो पूरा दिन उसी रंग में ढल जाता है.

सुबह खुद से यह कहना कि “आज का दिन अच्छा जाएगा” या “मैं अपना काम ठीक से कर पाऊंगा” मन में भरोसा भर देता है. यही भरोसा आगे चलकर मेहनत और फैसलों में झलकता है.

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