Hindu Idol Making Rules: देवी-देवता की मूर्ति बनाने में हर लकड़ी नहीं होती इस्तेमाल, जानिए किन पेड़ों की लकड़ी को शास्त्रों में माना गया है अशुभ?
Hindu Idol Making Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और आस्था का बहुत गहरा रिश्ता माना जाता है. यहां देवी-देवताओं की पूजा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं, नियमों और विश्वासों से जुड़ा विषय है. मंदिरों में रखी भगवान की मूर्तियों से लेकर घरों में स्थापित प्रतिमाओं तक, हर चीज के पीछे कुछ खास मान्यताएं और नियम जुड़े होते हैं. आम तौर पर लोग यह मानते हैं कि भगवान की मूर्ति बस सुंदर और आकर्षक होनी चाहिए, लेकिन सच्चाई यह है कि मूर्ति निर्माण के दौरान कई धार्मिक नियमों का ध्यान रखा जाता है. शास्त्रों और पुराणों में साफ तौर पर बताया गया है कि मूर्ति किस धातु, पत्थर या लकड़ी से बननी चाहिए और किन चीजों से दूरी रखना जरूरी है. खास तौर पर जब बात लकड़ी से बनी मूर्तियों की आती है, तो यहां नियम और भी सख्त हो जाते हैं. हर पेड़ की लकड़ी को मूर्ति बनाने के लायक नहीं माना गया है. कुछ लकड़ियां शुभ मानी जाती हैं, तो कुछ को अशुभ और पूजा के लिए अनुपयुक्त समझा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि गलत लकड़ी से बनी मूर्ति की पूजा करने से मनचाहा फल नहीं मिलता. यही वजह है कि पुराने समय से ही मूर्तिकार और पुजारी लकड़ी के चयन में बेहद सावधानी बरतते आए हैं. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किन पेड़ों की लकड़ी से भगवान की मूर्तियां नहीं बनाई जातीं, इसके पीछे क्या कारण माने जाते हैं और आखिर किन लकड़ियों को मूर्ति निर्माण के लिए शुभ समझा गया है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
इन पेड़ों की लकड़ियों से नहीं बनाई जाती मूर्तियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान की मूर्ति बनाने में कुछ खास तरह की लकड़ियों को वर्जित माना गया है. वजह यह है कि इन लकड़ियों को अशुभ, कमजोर या नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. मान्यता है कि दूध देने वाले पेड़, कमजोर टहनियों वाले पेड़, श्मशान के आसपास उगने वाले पेड़, पूरी तरह सूखे पेड़ और ऐसे पेड़ जिनके नीचे चींटी या सांप का घर हो, इनकी लकड़ी से मूर्ति नहीं बनानी चाहिए. कहा जाता है कि इन लकड़ियों से बनी मूर्तियों की पूजा निष्फल हो सकती है.
1. बबूल की लकड़ी
बबूल की लकड़ी काफी सख्त और मजबूत होती है, लेकिन इसके बावजूद इससे भगवान की मूर्ति नहीं बनाई जाती. धार्मिक मान्यता के अनुसार बबूल को अशुद्ध और तामसिक प्रवृत्ति वाला पेड़ माना गया है. इसी वजह से पूजा-पाठ या मूर्ति निर्माण में इसकी लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. माना जाता है कि इससे बनी मूर्ति सकारात्मक ऊर्जा नहीं दे पाती.
2. नीम की लकड़ियां
नीम का पेड़ अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और इसे पवित्र भी माना जाता है. घर के आसपास नीम का पेड़ होना शुभ समझा जाता है, लेकिन इसकी लकड़ी को मूर्ति बनाने के लिए ठीक नहीं माना गया है. मान्यता है कि नीम की लकड़ी कठोर जरूर होती है, लेकिन मूर्ति निर्माण के लिहाज से यह अनुपयुक्त होती है.
3. पलाश या ढाक के पेड़ की लकड़ी
पलाश या ढाक का पेड़ धार्मिक कामों में खूब इस्तेमाल होता है. इसके पत्ते और लकड़ी हवन, यज्ञ और पूजा सामग्री में काम आते हैं. इसके बाद भी पलाश की लकड़ी से मूर्ति नहीं बनाई जाती. वजह यह मानी जाती है कि यह लकड़ी ज्यादा टिकाऊ नहीं होती और जल्दी टूट-फूट का शिकार हो जाती है.
4. आम की लकड़ियां
आम का पेड़ हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है. इसके पत्तों का इस्तेमाल पूजा, हवन और मांगलिक कामों में किया जाता है. आम की लकड़ी को भी यज्ञ में काम लिया जाता है, लेकिन मूर्ति निर्माण में इसे वर्जित माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आम की लकड़ी मूर्ति के लिए स्थायित्व नहीं देती.

5. शमी और बेल का पेड़
शमी और बेल दोनों ही पेड़ धार्मिक रूप से बहुत अहम माने जाते हैं. शमी के पत्ते विजय और शुभता का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि बेल के पत्ते भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं. इन दोनों पेड़ों की पूजा होती है, इनके पत्ते चढ़ाए जाते हैं, लेकिन इनकी लकड़ी से मूर्ति नहीं बनाई जाती. मान्यता है कि इन पेड़ों की लकड़ी पूजा के दूसरे कामों के लिए ठीक है, मूर्ति निर्माण के लिए नहीं.
इन पेड़ों की लकड़ियों से होता है मूर्ति निर्माण
भगवान की मूर्ति बनाने के लिए कुछ खास लकड़ियों को बहुत शुभ माना गया है. इनमें सागवान, चंदन और सफेद आक के पेड़ की लकड़ी शामिल है. सागवान की लकड़ी मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली होती है, इसलिए इससे बनी मूर्तियां टिकाऊ मानी जाती हैं. चंदन की लकड़ी को बेहद पवित्र माना गया है और खास तौर पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की मूर्तियों के लिए इसे उत्तम समझा जाता है. सफेद आक की लकड़ी भी धार्मिक नजरिये से शुभ मानी जाती है.


