Kalashtami January 2026: 10 जनवरी को साल की पहली कालाष्टमी, काल भैरव की पूजा से मिटेंगे कष्ट-ग्रह दोष, जानें मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि, भोग
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Kalashtami January 2026: साल 2026 की पहली मासिक कालाष्टमी 10 जनवरी शनिवार को है. यह माघ की मासिक कालाष्टमी व्रत है. इसमें रुद्रावतार काल भैरव की पूजा की जाती है. काल भैरव को तंत्र और मंत्र का देवता माना जाता है. उनकी कृपा होने से ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है, अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है और कष्ट दूर होते हैं. शत्रुओं से सुरक्षा के लिए भी यह पूजा की जाती है. आइए जानते हैं साल की पहली कालाष्टमी की पूजा विधि, मुहूर्त, भोग आदि के बारे में.
दृक पंचांग के अनुसार, 10 जनवरी शनिवार को माघ कृष्ण अष्टमी तिथि और शनिवार दिन है. इस तिथि का प्रारंभ सुबह में 08:23 ए एम से होगा और पूरी रात तक है. सुकर्मा योग और चित्रा नक्षत्र में कालाष्टमी व्रत पर काल भैरव की पूजा होगी.

पंचांग अनुसार, इस दिन हस्त नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा, फिर चित्रा नक्षत्र लग जाएगा. वहीं अतिगण्ड शाम 4 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे. कालाष्टमी का पूजा रात्रि के समय में होती है.

कालाष्टमी की निशिता पूजा का मुहूर्त देर रात 12:02 ए एम से लेकर मध्य रात्रि 12:56 ए एम तक है. इस दिन का अभिजित मुहूर्त 12:08 पी एम से 12:50 पी एम तक है. सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 42 मिनट पर होगा. चंद्रोदय रात 12 बजकर 43 मिनट पर और चंद्रास्त सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा.
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कालाष्टमी भगवान काल भैरव के भक्तों के लिए विशेष है. इस दिन काल भैरव की विधि विधान से पूजा करते हैं. उस दौरान उन्हें प्रिय सरसों का तेल, काला तिल चढ़ाकर मस्तक पर भस्म लगाकर शृंगार करते हैं. साथ ही बड़ा, मालपुआ, जलेबी आदि का भोग लगाना चाहिए. काल भैरव के मंत्र ॐ कालभैरवाय नमः का जाप करना चाहिए.

जो लोग कालाष्टमी पर महाकाल भैरव के मंत्र ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नमः का जाप करते हैं. उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. भय, असाध्य रोग और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कालाष्टमी का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है. इस बार की कालाष्टमी पर राहुकाल सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही रहती है. (एजेंसी इनपुट के साथ)


