Hanuman Ji: भगवान राम से क्यों लड़ने पहुंच गए थे हनुमान जी? जानें 7 अनसुने किस्से, जिनसे अनजान थे अब तक आप
Last Updated:
Hanuman Ji Se Jude Ansune Kisse: रामायण का नाम आते ही हमारे मन में सबसे पहले श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की छवि उभरती है, लेकिन यदि गहराई से देखा जाए तो हनुमानजी के बिना रामायण की कल्पना अधूरी लगती है. वे केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भक्ति, बुद्धि और निस्वार्थ सेवा की मिसाल भी हैं. हनुमानजी का हर कदम श्रीराम की सेवा के लिए उठा और उनका हर निर्णय धर्म के रास्ते पर टिका रहा. आम तौर पर लोग उन्हें संजीवनी लाने वाले, लंका दहन करने वाले या विशाल पर्वत उठाने वाले वीर के रूप में जानते हैं, लेकिन उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जिनके बारे में कम ही चर्चा होती है.
इन रहस्यों में उनका जन्म, उनके गुरु, उनके रिश्ते और यहां तक कि श्रीराम से जुड़ा एक अनोखा युद्ध भी शामिल है. ये बातें सिर्फ धार्मिक कथा नहीं हैं, बल्कि हनुमानजी के व्यक्तित्व की गहराई को समझने का जरिया भी हैं. इस आर्टिकल में हम आपको पवनपुत्र से जुड़े ऐसे ही सात रोचक पहलुओं के बारे में बताएंगे, जो न केवल आपको चौंकाएंगे बल्कि हनुमानजी के प्रति आपकी आस्था को और मजबूत करेंगे.

1. हनुमानजी के बिना अधूरी मानी जाती है रामायण यह माना जाता है कि हनुमानजी के बिना रामायण पूरी नहीं होती. राम और रावण के युद्ध में वे अकेले ऐसे योद्धा थे जिन्हें कोई भी घायल नहीं कर सका. उन्होंने कभी अपने बल का घमंड नहीं किया और हर कार्य श्रीराम के नाम से किया. यही वजह है कि वे अजेय माने जाते हैं.

2. ये थे हनुमानजी के गुरु और यहीं हुआ था उनका जन्म हनुमानजी ने सूर्य देव और नारद मुनि से शिक्षा ली थी, लेकिन इसके अलावा उन्होंने ऋषि मातंग से भी ज्ञान प्राप्त किया था. मान्यता है कि उनका जन्म भी ऋषि मातंग के आश्रम में ही हुआ था. इसी आश्रम में देवी मातंगी का जन्म भी हुआ, जिन्हें दस महाविद्याओं में गिना जाता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

3. जब हनुमानजी अपने आराध्य श्रीराम से लड़ने चले यह बात सुनकर कई लोग चौंक जाते हैं कि एक बार हनुमानजी और श्रीराम आमने-सामने आए थे. राजा ययाति की रक्षा का वचन देकर हनुमानजी ने श्रीराम के सामने खड़े होकर सिर्फ राम नाम का जप किया. श्रीराम के सारे बाण निष्फल हो गए और अंत में युद्ध रोक दिया गया.

4. हनुमानजी और भीम थे भाई हनुमानजी और महाभारत के भीम के बीच हजारों वर्षों का अंतर था, फिर भी दोनों भाई माने जाते हैं. वजह यह है कि दोनों को पवनदेव का पुत्र माना गया है. इसी कारण दोनों अपार शक्ति के स्वामी थे और युद्ध में अजेय माने जाते थे.

5. मां जगदंबा के अनन्य भक्त थे पवनपुत्र हनुमानजी सिर्फ श्रीराम के ही नहीं, बल्कि मां जगदंबा के भी बड़े भक्त थे. मान्यता है कि जहां माता का मंदिर होता है, वहां हनुमानजी की उपस्थिति भी जरूर होती है. कई जगह उनकी कथा माता वैष्णो देवी से भी जुड़ी मानी जाती है.

6. लंका के यज्ञ से जुड़ा चौंकाने वाला रहस्य राम-रावण युद्ध से पहले रावण ने देवी को प्रसन्न करने के लिए एक बड़ा यज्ञ कराया. हनुमानजी ने साधु का रूप लेकर वहां ब्राह्मणों की सेवा की और मंत्रों में एक शब्द बदलवा दिया. इसी कारण देवी रुष्ट हुईं और रावण को हार का सामना करना पड़ा.

7. भक्ति और बुद्धि का अनोखा संगम हनुमानजी केवल बलवान ही नहीं थे, वे अत्यंत बुद्धिमान भी थे. हर परिस्थिति में उन्होंने विवेक से काम लिया और अहंकार से दूर रहे. यही गुण उन्हें देवताओं में भी विशेष बनाता है और आज भी करोड़ों लोग उन्हें आदर्श मानते हैं.


