Kharmas Ki Kahani: क्यों खरमास में नहीं होते शुभ काम? गधे की इस कहानी से अनजान हैं 90% लोग, हर किसी को जानना है जरूरी

Kharmas Ki Kahani: क्यों खरमास में नहीं होते शुभ काम? गधे की इस कहानी से अनजान हैं 90% लोग, हर किसी को जानना है जरूरी

Kharmas 2025: खर्मास हिन्दू कालगणना में एक विशेष समय है. यह वो अवधि है जब सूर्योदय का प्रभाव कम माना गया है और इसलिए सामान्य जीवन के शस्त्र यानी विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े कार्यक्रम टाल दिए जाते हैं. लोग मानते हैं कि इस समय शुभ कार्यों का परिणाम ठीक नहीं मिलता. इसी कारण से खर्मास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. पर यह वर्जन केवल विश्वास पर आधारित नहीं बल्कि उसकी पौराणिक कथा भी उपलब्ध है. इंसान समय और ग्रहों के गमन को देखते हुए किसी भी कार्य के आरंभ या समापन का निर्णय लेते रहे हैं. खर्मास की कथा में भी एक पुरानी कथा मिलती है जिसमें सूर्यदेव और अन्य देवों का वर्णन आता है. यह काल एक महीने का होता है और साल में दो बार आता है.

2025 में खर्मास का आखिरी खंड दिसंबर की मध्य से प्रारंभ हुआ है. ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार सूर्यदेव जब धनु राशि में प्रवेश करते हैं तो खर्मास आरंभ हो जाता है. इसी प्रकार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है तब भी एक खर्मास आती है. इस आर्टिकल में हम 2025 के इस चल रहे खर्मास, उसकी कथा और उसकी विशेषताओं को सरल भाषा में जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

खर्मास किस दिन से 2025 में शुरू हुआ?
2025 में वर्तमान खर्मास 16 दिसंबर को लगा, जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश किये. यह अवधि लगभग 30 दिन तक रहेगी और 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगी. इन दिनों में सभी बड़े मांगलिक कार्यों को टाला जाता है.

खर्मास की पौराणिक कथा
खर्मास से जुड़ी कथा मार्कण्डेय पुराण में मिलती है. संस्कृत में खर का मतलब होता है गधा. कथा के अनुसार एकबार सूर्यदेव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकले. इस दौरान जब घोड़ों को भूख और प्यास लगी, तब सूर्यदेव उनकी दयनीय दशा को देखकर सहानुभूत हुए और उन घोड़ों को आराम देने का निर्णय लिया.

फिर उन्हें ध्यान आया कि अगर रथ रुक गया तो सृष्टि का चक्र प्रभावित हो जाएगा. ऐसे सूर्यदेव की नजर उन दो खर यानी गधों पर पड़ी जो तालाब किनारे पानी पी रहे थे. उन्होंने सोचा कि रथ में इन्हें लगाकर घोड़ों को कुछ देर के लिए आराम दे दिया जाए जिससे रथ भी चलता रहेगा और घोड़े आराम भी कर लेंगे. लेकिन गधों और घोड़ों की बराबरी असंभव है. रथ में गधों को जोड़ा तो रथ की स्पीड कम हो गई और पृथ्वी की वो परिक्रमा 1 महीने में पूरी हुई. कथानुसार इस देरी से सूर्यदेव के तेज में कमी आई. यही कारण है कि खरमास में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता.

खर्मास में क्या नहीं करना चाहिए?
खर्मास के समय विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे बड़े जीवन के आयोजन नहीं किये जाते. ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्यदेव का प्रभाव सामान्य से कम रहता है और इसलिए किसी भी नए आरंभ का परिणाम स्थिर नहीं रह सकता. खर्मास के दिनों में साधारण पूजा, दान और भक्ति के कार्य करने को वर्जित नहीं माना जाता, बल्कि इसे शुभ माना गया है.

खर्मास की सामाजिक परंपरा
समाज में खर्मास को एक तरह से विश्राम, संयम और धार्मिक ध्यान का समय माना गया है. लोग इस महीने में भजन, कीर्तन, दान और सेवा कार्य पर अधिक ध्यान देते हैं. बाल विवाह, नामकरण आदि कार्य टालने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह नियम आज भी कई परिवारों द्वारा मनाया जाता है.

समय की गणना और दो खर्मास
जैसा कि बताया गया, खर्मास साल में दो बार आता है. एक बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और दूसरी बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है. दोनों बार लगभग एक महीने का समय खर्मास के नाम से जुड़ा रहता है. इसका कारण ज्योतिषीय गणना में सूर्य की स्थिति का परिवर्तन माना जाता है.

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