Shardiya Navratri Day 1 : कुंडली में चंद्रमा का हर दोष होगा निष्प्रभावी, बरसेगी मां शैलपुत्री की दया, जरूर करें ये उपाय

Shardiya Navratri Day 1 : कुंडली में चंद्रमा का हर दोष होगा निष्प्रभावी, बरसेगी मां शैलपुत्री की दया, जरूर करें ये उपाय

Shardiya Navratri Day 1 Chandrama Upaye: 3 अक्तूबर यानी कल से शारदीय नवरात्र आरंभ होने जा रहे हैं और चारों तरफ माता रानी के स्‍वागत की तैयार‍ियां शुरू हो चुकी हैं. नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. वैसे तो मां दुर्गा के भक्त सभी नवरात्र में जगत जननी की कृपा पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है. घट स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त 3 अक्तूबर को सुबह 6:16 बजे से 7:21 बजे तक है. इस दिन दोपहर में भी कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त है, जो 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक है. सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर प्रदुमन सूरी के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थान पर है, उन्‍हें नवरात्र के पहले द‍िन ये उपाय करने चाहिए.

मां शैलपुत्री के मस्तक पर अर्धचंद्र होता है. मां को नवरात्रि के पहले दिन सफेद रंग के पुष्प, सफेद दिखने वाले खाद्य पदार्थ खीर, चावल, सफेद मिष्ठान आदि का भोग लगाना चाहिए. उनको गाय के घी का भोग लगाएं. गाय के ही घी का दीपक जलाकर आरती करें. इनके कवच का पाठ करने से भी व्यक्ति की जन्मकुंडली से चंद्र दोष दूर होने लगता है. कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थान पर होने पर व्यक्ति मानसिक बीमारी, नींद की कमी, निर्णय लेने में मुश्किल होने जैसी समस्याओं से जूझता है. ऐसा व्यक्ति मानसिक रूप से अशांत रहता है. जबकि वृषभ यानी बैल पर सवार, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करने वाली माता की पूजा करने से व्यक्ति में सौम्यता, करुणा, स्नेह और धैर्य गुणों की वृद्धि होती है. एस्ट्रोलॉजर प्रदुमन सूरी के अनुसार, मां शैलपुत्री की कृपा से व्यक्ति में तपस्या का गुण भी विकसित होता है.

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं. (Canva)

कौन हैं मां शैलपुत्री

पौराणिक कथा के अनुसार जब आदिशक्ति मां ने माता पार्वती के रूप में पुनः जन्म लिया था तब वह मनुष्य अवतार में थीं. भगवान शिव के समान दैवीय अवतार धारण करने और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता ने घोर तपस्या की जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी रूप में स्वीकार किया. उनके नाम को लेकर एक प्रचलित मान्यता है कि हिमालय को संस्कृत भाषा में शैल कहा जाता है ऐसे में हिमालय राज की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा. मां शैलपुत्री को वृषोरूढ़ा, सती, हेमवती, उमा के नाम से भी जाना जाता है. मां शैलपुत्री का वर्ण एकदम श्वेत होने के साथ उनका प्रिय रंग भी सफेद है.

Tags: Navratri Celebration, Navratri festival

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