15 दिसंबर के बाद क्यों बंद हो जाएंगे शादी-विवाह और शुभ कार्यक्रम? आसान शब्दों में जानें खरमास का कॉन्सेप्ट

15 दिसंबर के बाद क्यों बंद हो जाएंगे शादी-विवाह और शुभ कार्यक्रम? आसान शब्दों में जानें खरमास का कॉन्सेप्ट

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Kharmas 2025 : हर साल की तरह इस बार भी 15 दिसंबर से खरमास की अवधि शुरू हो जाएगी, जिसके चलते शादी-विवाह, गृह प्रवेश और सभी शुभ मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तब एक माह तक शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं. आसान शब्दों में कहें तो इस अवधि में धार्मिक मान्यताओं के कारण कोई नया शुभ कार्य नहीं किया जाता.

हरिद्वार. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 15 दिसंबर सोमवार का दिन खास होने वाला है. इस दिन से कुछ कार्यों पर रोक लगेगी तो कुछ कार्य करने पर विशेष लाभ मिलेगा. ‘ग्रहों के स्वामी ‘सूर्य देव गुरु की राशि में प्रवेश करेंगे जिससे खरमास की शुरुआत हो जाएगी. हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार, खरमास में मांगलिक कार्य विशेष कर विवाह संस्कार आदि करना अशुभ होता है. खरमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार वर्जित माना जाता है.

हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया कि 15 दिसंबर सोमवार को ‘ग्रहों के स्वामी’ सूर्य देव गुरु बृहस्पति की धनु राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य ग्रह के धनु राशि में प्रवेश करने पर गुरु बृहस्पति का बल और शुभ प्रभाव कमजोर हो जाता हैं जिस कारण इस अवधि के दौरान मांगलिक कार्य करने पर कोई शुभ फल नहीं मिलेगा. गुरु बृहस्पति के मजबूत होने के कारण ही मांगलिक कार्य किए जाते हैं लेकिन जब सूर्य का गोचर गुरु की राशि में होता है तो इन सभी कार्यों की शुभ तिथि शास्त्रों में नहीं आती है. साल 2025 में 15 दिसंबर की दोपहर 3:36 पर सूर्य देव गुरु की धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 14 जनवरी 2026 तक धनु राशि में ही गोचर करेंगे.

कब लगता है खरमास ?
ज्योतिषी गणना के अनुसार सूर्य देव एक राशि में करीब 30 दिनों तक रहते हैं. सभी 12 राशियों में धनु और मीन राशि गुरु बृहस्पति को समर्पित होती है इसलिए जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो खरमास की शुरुआत होती है. खरमास में मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते. क्योंकि सूर्य के धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करने पर गुरु का बल और सूर्य का तेज मंद पड़ जाता है. सूर्य ग्रह ‘आत्मा और पिता के कारक’ है जबकि गुरु शुभ कार्यों जैसे विवाह, शिक्षा आदि के कारक होते हैं इसलिए इनका बल और तेज कम होने के कारण मांगलिक कार्यों के पूर्ण नहीं होने की आशंका रहती है.

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मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

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