Mokshada Ekadashi Katha 2025: 1 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी, पूजा के समय पढ़ें यह व्रत कथा, जानें मुहूर्त और पारण समय
मोक्षदा एकादशी मुहूर्त और पारण
- मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि का शुभारंभ: 30 नवंबर, रविवार, 9:29 पीएम से
- मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि का समापन: 1 दिसंबर, सोमवार, 7:01 पीएम पर
- मोक्षदा एकादशी पूजा मुहूर्त: सुबह 6:56 बजे से सुबह 8:15 बजे तक, सुबह 9:33 बजे से सुबह 10:52 बजे तक
- मोक्षदा एकादशी व्रत पारण का समय: 2 दिसंबर, मंगलवार, सुबह 6:57 बजे से सुबह 9:03 बजे तक
- द्वादशी तिथि का समापन: 2 दिसंबर, दोपहर 3:57 बजे
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के बारे में पूछा. उन्होंने माधव से इस व्रत की विधि और महत्व के बारे में जानना चाहा. इस निवेदन पर भगवान श्रीकृष्ण ने उनको बताया कि जो लोग मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके सभी पाप मिट जाते हैं और उनको मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह एकादशी व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला है, इसलिए यह मोक्षदा एकादशी नाम से प्रसिद्ध है.
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा और महत्व के बारे में बताया. मोक्षदा एकादशी कथा के अनुसार, गोकुल नगर में वैखानस नाम का राजा था. एक रात वह सोया हुआ था, तभी उसे सपने में उसके पिता दिखाई दिए. वे नरक में थे और यम के कष्टों को भोग रहे थे. सुबह जब नींद खुली तो वह काफी दुखी था.
राजा वैखानस ने अपने दरबार में विद्वानों और मंत्रियों को बुलाया. फिर सपने की बात बताई. राजा ने उनसे कहा कि उसके पिता का कहना है कि वे नरक के कष्ट भोग रहे हैं, इससे मुक्ति दिलाने का उपाय करो. वैखानस ने दरबार के सभी लोगों से इसका उपाय पूछा. उसने कहा कि ऐसे जीवन का क्या मतलब है, यदि वह अपने पिता को नरक से मुक्ति न दिला सके. एक बेटा अपने पूर्वजों का कल्याण कर सकता है.
राजा की बात सुनने के बाद उनके दरबार के सदस्यों ने बताया कि नगर से कुछ दूरी पर पर्वत ऋषि रहते हैं, उनके पास इस समस्या का उपाय होगा. अगले दिन राजा वैखानस पर्वत ऋषि के पास गए. उन्होंने ऋषि को प्रणाम किया और अपने मन की व्यथा बताई. पर्वत ऋषि ने अपने तपोबल से राजा के पिता का पूरा जीवन देख लिया.
उसके बाद उन्होंने राजा वैखानस से कहा कि पूर्वजन्म में आपके पिता ने काम वासना की वजह से एक पत्नी को रति दी. लेकिन उसके कहने पर दूसरी पत्नी को ऋतुदान नहीं किया. इस पाप के कारण आपके पिता नरक के कष्ट भोग रहे हैं. इस पर राजा ने मुक्ति का उपाय पूछा.
तब पर्वत ऋषि कहा कि मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी आ रही है, उस दिन मोक्षदा एकादशी व्रत है. तुम विधिपूर्वक मोक्षदा एकादशी व्रत करो. फिर उस व्रत के पुण्य को संकल्प करके अपने पिता को दान कर दो. इससे आपके पिता नरक के कष्टों से मुक्त हो जाएंगे. राजा ने पर्वत ऋषि से आज्ञा ली और अपने राजमहल आ गए.
जब मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी आई तो राजा ने विधिपूर्वक मोक्षदा एकादशी व्रत रखा और भगवान दामोदर की पूजा की. पारण के दिन मोक्षदा एकादशी व्रत के पुण्य को पिता के नाम से संकल्प कराके दान कर दिया. भगवान विष्णु की कृपा से राजा के पिता नरक से मुक्त हो गए और उनके कष्ट मिट गए. फिर वे स्वर्ग चले गए. इसी प्रकार से जो लोग मोक्षदा एकादशी व्रत रखते हैं, वे मोक्ष प्राप्त करते हैं.


