तिरुपति बाला जी मंदिर में मिला चर्बी वाला लड्डू, पवित्र करने के लिए हुआ इस तरह शुद्धिकरण, जानें महत्व

तिरुपति बाला जी मंदिर में मिला चर्बी वाला लड्डू, पवित्र करने के लिए हुआ इस तरह शुद्धिकरण, जानें महत्व

Tirupati Balaji Mandir: तिरुपति बालाजी मंदिर का लड्डू विवाद गहराता जा रहा है. आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसादम के रूप में बनने वाले लड्डू में जानवरों की चर्बी होने की बात से लाखों श्रद्धालुओं की भावनओं को ठेस पहुंची है. देश भर में ये खबर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. फिलहाल, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन सरकार ने किया है, ताकि इसकी जांच जल्द से जल्द की जा सके और सच्चाई को सामने लाया जा सके. फिलहाल, आज सुबह मंदिर का शुद्धिकरण किया गया, ताकि अपवित्रता को दूर किया जा सके. इसके लिए सुबह 6 बजे से ही शांति होमम और वास्तु पूजा की गई. पंचगव्य (गोबर, गौ मूत्र, दूध, घी, दही) से मंदिर को शुद्ध किया गया. जानते हैं क्या होती है शुद्धिकरण और इसकी प्रक्रिया.

क्या है शुद्धिकरण?
शुद्धिकरण यानी किसी वस्तु की साफ-सफाई करके उसे शुद्ध बनाना है. अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. अगर हम धार्मिक संदर्भ की बात करें तो इसमें मन, आत्मा, शरीर की शुद्धि की जाती है. इसके लिए लोग उपवास करते हैं. पूजा-पाठ करते हैं. ध्यान करते हैं. इसके जरिए आप अपने अंदर की बुराइयों, पापों, खामियों, दोषों को दूर कर सकते हैं. इनसे मुक्ति पा सकते हैं. तन की शुद्धि स्नान करके और मन की शुद्धि साधना से की जाती है.

क्या है महा शांति होमम?
तिरुपति बालाजी मंदिर में शुद्धिकरण के लिए आज महा शांति होमम का आयोजन किया गया. शांति होमम मंदिर के प्रशासन की तरफ से आयोजित किया गया. महा शांति होमम, इसलिए किया गया, ताकि मंदिर के प्रसादम लड्डू में यदि जानवरों की चर्बी मिलाए जाने के कारण मंदिर अपवित्र हुई है तो इसके जरिए इस अपवित्रता को दूर किया जा सके. मुख्य रूप से महा शांति होमम शुद्धिकरण के लिए होता है.

महा शांति होमम का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म के अनुसार, किसी भी स्थान को साफ करने के लिए ही उसका शुद्धिकरण कया जाता है. महा शांति होमम के दौरान कई तरह के मंत्र जपे जाते हैं. हवन किए जाते हैं. इससे वह स्थान पवित्र हो जाता है.

घर की मंदिर को ऐसे करें शुद्ध करने के उपाय
यदि घर या कहीं भी जब कोई मंदिर स्थापित की जाती है तो उस स्थान को पहले शुद्ध किया जाता है. इसके लिए शुद्ध जल से छीटें मारें. कुमकुम लगाएं. गंगाजल या सामान्य पानी में शुद्ध दूध मिलाकर उसमें फूल या आम का पत्ता डाल दें. दाए हांथ की तीन उंगलियों से जल की छीटें मंदिर पर मारें.

शनिवार का दिन बेहद शुभ माना गया है मंदिर की साफ-सफाई के लिए. सफाई के बाद यदि आप गंगाजल के छींटे मारते हैं तो इससे मां लक्ष्मी का आपके घर में वास होगा. घर से नेगेटिविटी दूर होगी. आप बृहस्पतिवार, रविवार के दिन भी मंदिर की सफाई का काम कर सकते हैं. ये दिन भी इस कार्य के लिए अच्छे माने गए हैं.

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(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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