Suryanarayana Swamy Mandir: यहां दोनों पत्नियों के साथ भगवान सूर्य देते हैं दर्शन, भक्तों के हर कष्ट को करते हैं दूर

Suryanarayana Swamy Mandir: यहां दोनों पत्नियों के साथ भगवान सूर्य देते हैं दर्शन, भक्तों के हर कष्ट को करते हैं दूर

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Suryanarayana Swamy Mandir: वैसे तो भारत में सूर्य नारायण के कई मंदिर हैं लेकिन आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पास पेद्दापुडी मंडल में भगवान सूर्य का सूर्यनारायण स्वामी मंदिर बेहद खास माना जाता है. यहां भगवान सूर्य दोनों पत्नियों के साथ दर्शन देते हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं. आइए जानते हैं सूर्यनारायण स्वामी मंदिर के बारे में खास बातें.

देशभर में भगवान सूर्य के कई मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर जाते हैं. सूर्य भगवान की पूजा करने से जीवन में उन्नति होती है और शत्रुओं का नाश होता है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है. कहा जाता है कि भगवान शिव से लड़ाई में भगवान सूर्य के 12 टुकड़े हो गए थे और जहां-जहां उनके टुकड़े गिरे, वहां भगवान सूर्य के मंदिरों का निर्माण कराया गया. आंध्र प्रदेश में भी ऐसा मंदिर है, जहां भगवान सूर्य अपनी दोनों पत्नियों के साथ विराजमान हैं. आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पास पेद्दापुडी मंडल के गोलाला ममीदादा गांव में भगवान सूर्य का सूर्यनारायण स्वामी मंदिर स्थापित है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

सूर्यनारायण स्वामी मंदिर के बारे में खास बातें – सूर्यनारायण स्वामी मंदिर थुल्या भागा (तुंगभद्रा) नदी के किनारे बना है. मंदिर 16 एकड़ में फैला है और इसका गोपुरम (प्रवेश द्वार का आकार) 170 फीट ऊंचा है, जिसे अलग-अलग नक्काशियों से सजाया गया है. गोपुरम पर अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को बारीकी से उकेरा गया है, जिसमें हिंदू धर्म के महाकाव्यों को दिखाने की कोशिश की गई है. इस कला को चिन्ना भद्राचलम के नाम से जाना जाता है. गोपुरम को सजाने के लिए विभिन्न रंगों का इस्तेमाल किया गया है.

इन्होंने करवाया मंदिर का निर्माण – मंदिर की स्थापना साल 1920 में श्री कोव्वुरी बसिवि रेड्डी गारू नाम के समाजसेवी ने की थी. गारू के बारे में कहा जाता है कि गांव में उनके समान धार्मिक और दानी इंसान कोई नहीं था. उन्होंने न केवल मंदिर के लिए समर्पित सेवा प्रदान की है, बल्कि अपना जीवन भी बड़े पैमाने पर जनता के लाभ और कल्याण में बिता दिया. उन्होंने ही मंदिर का निर्माण कराया है और आज भी हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान सूर्य की पूजा की जाती है.

दोनों पत्नी के साथ हैं विराजमान – मंदिर का प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह तक दोनों ही देखने लायक हैं. प्रवेश द्वार पर सूर्य भगवान सात घोड़ों के साथ रथ को चला रहे हैं, जबकि मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य अपनी दोनों पत्नी ऊषा और छाया के साथ विराजमान हैं. मान्यता है कि मंदिर में आकर भक्त मनोकामना पूरी करने के लिए दोबारा मंदिर में आने का संकल्प लेते हैं. वहां भक्तों के बीच भगवान के नाम पर कसम लेने की प्रथा है और मनोकामना पूरी होने पर कसम या संकल्प को पूरा भी करते हैं.

दर्शन से सभी कष्ट होते हैं खत्म – गर्भगृह में विराजमान भगवान सूर्य और उनकी दोनों पत्नियों के दर्शन से सुख-संपत्ति और दांपत्य जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है. भक्त दूर-दूर से भगवान सूर्य का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में आते हैं. रविवार के दिन मंदिर में ज्यादा भीड़ होती है, क्योंकि रविवार को मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान किए जाते हैं.

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यहां दोनों पत्नियों के साथ भगवान सूर्य देते हैं दर्शन, हर कष्ट करते हैं दूर

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