Shani Pradosh Vrat 2025 Date: धनतेरस पर शनि प्रदोष का शुभ संयोग, शिव कृपा से मिलेगा संतान सुख, पूजा का 2:31 घंटे का मुहूर्त

Shani Pradosh Vrat 2025 Date: धनतेरस पर शनि प्रदोष का शुभ संयोग, शिव कृपा से मिलेगा संतान सुख, पूजा का 2:31 घंटे का मुहूर्त

Shani Pradosh Vrat 2025 Date:  इस बार धनतेरस पर शनि प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बना है. धनतेरस पर लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने से धन और संपत्ति में बढ़ोत्तरी होती है, वहीं शनि प्रदोष व्रत और शिव पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है. वैसे भी यह कृष्ण पक्ष का शनि प्रदोष है, जो संतान प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है. प्रदोष व्रत करने से ​शिव कृपा प्राप्त होती है, दुख, रोग, भय, संकट, पाप आदि का नाश होता है. य​ह व्रत सभी प्रकार के दोषों को मिटा देने में सक्षम माना जाता है.

शनि प्रदोष कब है?

दृ​क पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक मान्य रहेगी. प्रदोष पूजा मुहूर्त के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत 18 अक्टूबर शनिवार को रखा जाएगा. उस दिन धनतेरस भी है.

शनि प्रदोष मुहूर्त

इस बार शनि प्रदोष के दिन शिव पूजा के लिए 2 घंटे 31 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है. उस दिन​ भक्त शिव जी की पूजा शाम को 5 बजकर 48 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 20 मिनट के बीच कभी भी कर सकते हैं. प्रदोष काल में ही धनतेरस की भी पूजा होगी, जिसमें कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी.

शिव जी की प्रदोष पूजा के समय में लाभ-उन्नति मुहूर्त होगा, जो व्यक्ति की उन्नति का कारक होगा. उस शाम लाभ-उन्नति मुहूर्त 05 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 23 मिनट तक है.

प्रदोष व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:43 ए एम से 05:33 ए एम तक रहेगा, यह समय स्नान के लिए उत्तम होता है. वहीं प्रदोष के दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक है. इस समय में आप कोई शुभ कार्य कर सकते हैं.

ब्रह्म योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शिव पूजा

शनि प्रदोष व्रत की पूजा के समय ब्रह्म योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है. उस दिन ब्रह्म योग प्रात:काल से लेकर मध्य रात्रि 01:48 ए एम तक है, वहीं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 03 बजकर 41 मिनट तक है, उसके बाद से उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है.

शनि प्रदोष पर शिववास

शनि प्रदोष व्रत के दिन शिववास नन्दी पर दोपहर 12:18 पी एम तक है. उसके बाद शिववास भोजन में है. जब तक शिववास नंदी पर है, उस समय में आप रुद्राभिषेक करके उत्तम फल की प्राप्ति कर सकते हैं.

शनि प्रदोष व्रत के फायदे

शनि प्रदोष का व्रत करने से सभी दुख और कष्ट मिटते हैं. शिव कृपा से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. खासकर जिन लोगों को संतान सुख प्राप्त नहीं है, वे लोग शनि प्रदोष व्रत रखकर संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं. शिव कृपा से धन, वैभव, सुख, संपत्ति आदि की प्राप्ति होती है.

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