Solar Eclipse 2025 : सूर्य ग्रहण बच्चों के लिए खतरनाक! शरीर के इन दो नाजुक हिस्सों पर डालता है दुष्प्रभाव, बरतें ये 4 सावधा

Solar Eclipse 2025 : सूर्य ग्रहण बच्चों के लिए खतरनाक! शरीर के इन दो नाजुक हिस्सों पर डालता है दुष्प्रभाव, बरतें ये 4 सावधा

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Solar Eclipse 2025 : आश्विन अमावस्या को साल 2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है. अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ग्रहण का आंखों और स्किन पर प्रभाव डालता है और बच्चों को किन सावधानियों को बरतना चाहिए. आइए इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं ग्रहण का बच्चों पर क्या प्रभाव डालते हैं…

सूर्य ग्रहण बच्चों के लिए खतरनाक! शरीर के इन हिस्सों पर डालता है दुष्प्रभाव
Grahan Ka Baccho Par Prabhav : आश्विन अमावस्या पर साल 2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है और यह ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित हो रहा है. ग्रहण को लेकर लोगों में धार्मिक आस्था भी गहरी है और वैज्ञानिक चेतावनी भी उतनी ही गंभीर. ग्रहण काल में शारीरिक पूजा नहीं बल्कि मानसिक पूजा का महत्व होता है. दूसरी ओर डॉक्टर साफ चेतावनी दे रहे हैं कि ग्रहण के समय सूरज को सीधे देखना बच्चों की आंखों और स्किन के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. साथ ही ग्रहण से निकलने वाली रेडिएशन बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण बच्चों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इसका ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्या महत्व है…

नंगी आंख से भूलकर भी ना देखें सूर्य ग्रहण

archildrens.org के अनुसार, सूर्य ग्रहण को भूलकर भी नंगी आखों से नहीं देखना चाहिए, यह आपकी आंखों को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा सकता है. आंख के रंगीन भाग आईरिस का काम प्रकाश को नियंत्रित करना होता है, ग्रहण की रोशनी कम होने की वजह से आईरिस पुतली को बड़ा कर देती है. साथ ही ग्रहण की यूवी किरणों से भी दृष्टि हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है. इसलिए ग्रहण को हमेशा सुरक्षित सौर फिल्टर या प्रमाणित चश्मों से ही देखना चाहिए. सूर्य ग्रहण बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है क्योंकि उनके आंखों के लैंसिस किसी बड़े व्यक्ति की तुलना में ज्यादा क्लियर होते हैं और ग्रहण को देखने के चक्कर में पुतलियां बड़ी हो जाती हैं, जिससे ग्रहण की रोशनी सीधा अंदर तक जाती है. इससे बच्चों की आंखों को चोट और डैमेज हो सकता है.

सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व

धर्मग्रंथों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, हवन और शुभ कार्य करना वर्जित होता है. माना जाता है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. ग्रहण के बाद स्नान-दान और पवित्र जल से शुद्धिकरण करना जरूरी माना गया है. खासकर आश्विन अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और दान का विशेष महत्व होता है. लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. इस वजह से आप बिना किसी विघ्न के आश्विन अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध व तर्पण कर सकते हैं. साथ ही शारदीय नवरात्रि की धूमधाम से तैयारियां कर सकते हैं.

सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है. लेकिन इस दौरान सूरज की हानिकारक किरणें सीधी आंखों तक पहुंच सकती हैं, जिससे आंखों की रेटिना जलने का खतरा होता है. खासतौर पर बच्चों को ग्रहण के समय बाहर ले जाना जोखिम भरा साबित हो सकता है. यही नहीं, स्किन पर भी अल्ट्रावॉयलेट किरणों का असर पड़ सकता है. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि बिना स्पेशल फिल्टर वाले चश्मे के ग्रहण को बिल्कुल न देखें.

सूर्य ग्रहण के दौरान बरतें सावधानियां
– बच्चों और बुजुर्गों को ग्रहण के समय घर के अंदर रखें.
– साधारण चश्मे, काले कांच या पानी में देखकर ग्रहण देखने की कोशिश न करें.
– अगर देखना जरूरी हो तो केवल मान्यता प्राप्त सोलर ग्लासेस का इस्तेमाल करें.
– ग्रहण के बाद स्नान और भोजन से पहले शुद्धिकरण करना धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से अच्छा माना जाता है.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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