Jitiya Kab hai 2025: जीतिया कब है, 14 या 15 सितंबर? तारीख पर है कन्फ्यूजन तो पंडित जी से जानें सही डेट और मुहूर्त

Jitiya Kab hai 2025: जीतिया कब है, 14 या 15 सितंबर? तारीख पर है कन्फ्यूजन तो पंडित जी से जानें सही डेट और मुहूर्त

जीतिया व्रत आश्विन मा​स के कृष्ण पक्ष की अष्टमी ति​थि को रखा जाता है. इस बार जीतिया व्रत की तारीख पर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है क्योंकि जीतिया के लिए आश्विन कृष्ण अष्टमी ति​थि 14 सितंबर और 15 सितंबर दो दिन है. जीतिया व्रत को जिउतिया और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं. इस बार जीतिया पर रवि योग, सिद्धि योग और रोहिणी नक्षत्र​ का संयोग बना है. महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय से जानते हैं ​कि जीतिया कब है?

जीतिया व्रत की सही तारीख

दृक पंचांग के अनुसार, इस साल 14 सितंबर रविवार को सुबह 5:04 बजे आश्विन कृष्ण अष्टमी ति​थि का शुभारंभ हो रहा है और यह 15 सितंबर सोमवार को 03:06 एएम तक मान्य है.

शास्त्रों के अनुसार, जीतिया व्रत के लिए उदयातिथि की मान्यता है. ऐसे में 14 सितंबर को जीतिया व्रत की उदयातिथि प्राप्त हो रही है, जबकि 15 सितंबर को अष्टमी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही खत्म हो जा रही है. ऐसे में लोगों को कन्फ्यूज होने की जरूरत नहीं है. आप 14 सितंबर दिन रविवार को जीतिया व्रत रखें.

संतान के लिए रखते हैं जीतिया व्रत

ज्योतिषाचार्य पाण्डेय का कहना है कि माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, आरोग्य और सुखी जीवन के लिए जीतिया व्रत रखती हैं. जीतिया व्रत में माताओं को अन्न, जल, फल आदि का सेवन नहीं करना होता है. जीतिया एक कठिन व्रत है क्योंकि इसे निर्जला रखा जाता है. जीतिया व्रत में गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करने की परंपरा है.

व्रत के दिन सिद्धि योग सुबह 07:35 ए एम से बनेगा, जो पूरी रात रहेगा. 15 सितंबर को सुबह 04:55 ए एम पर खत्म होगा. वहीं व्रत के दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 08:41 ए एम तक है, उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र है.

जीतिया शुभ मुहूर्त

जीतिया व्रत में पूजा सुबह और प्रदोष काल में होती है. सुबह की पूजा रवि योग में कर लें और 14 सितंबर को सूर्यास्त 06:27 पी एम पर होगा. उसके बाद से प्रदोष काल शुरू होगा. ऐसे में 06:27 पी एम के बाद प्रदोष काल वाली पूजा करें. उस दिन अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से 12:41 पी एम तक है.

जीतिया व्रत का पारण समय

जीतिया व्रत का पारण 15 सितंबर को किया जाएगा. माताएं पारण वाले दिन सुबह में स्नान के बाद पूजा पाठ कर लें. सूर्योदय के पश्चात यानि 06:06 ए एम के बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

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