इंदिरा एकादशी का व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाता है. इस साल इंदिरा एकादशी के दिन परिघ योग और पुनर्वसु नक्षत्र है. जो लोग अपने पितरों को मुक्ति प्रदान करना चाहते हैं, वे इंदिरा एकादशी का व्रत जरूर रखें और पूजा पाठ करें. इंदिरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पितरों को अधोगति से मुक्ति मिलती है, उनको यमलोक की यातनाएं नहीं सहन करनी पड़ती हैं, उनको विष्णु लोक में स्थान मिलता है. वहीं व्रत करने वाला व्यक्ति भी मृत्यु के बाद स्वर्ग प्राप्त करता है.
इंदिरा एकादशी व्रत की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर को 12:21 ए एम से प्रारंभ होगी. इस तिथि का समापन 17 सितंबर को ही रात 11:39 पी एम पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत17 सितंबर दिन बुधवार को है.
2 शुभ योग में इंदिरा एकादशी व्रत
इस बार इंदिरा एकादशी के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं. इंदिरा एकादशी पर परिघ योग और शिव योग बनेंगे. एकादशी पर परिघ योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 55 मिनट तक है, उसके बाद से शिव योग बनेगा. इंदिरा एकादशी पर पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र है. पुनर्वसु नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 06:26 ए एम तक है, उसके बाद से पुष्य नक्षत्र है.
इंदिरा एकादशी मुहूर्त
इंदिरा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम तक है. इस समय में आप स्नान, दान आदि कर सकते हैं. उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 06:07 ए एम से 07:39 ए एम तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:39 ए एम से 09:11 ए एम तक है, जबकि शुभ-उत्तम मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम तक है. उसके बाद से राहुकाल शुरू हो जाता है. राहुकाल से पहले ही इंदिरा एकादशी की पूजा कर लें.
इंदिरा एकादशी पारण समय
यदि आप 17 सितंबर को इंदिरा एकादशी का व्रत हैं तो आपको व्रत का पारण 18 सितंबर को सुबह 06:07 ए एम से 08:34 ए एम के बीच पारण कर लेना चाहिए. पारण के दिन द्वादशी का समापन रात में 11 बजकर 24 मिनट पर होगा.
2. इंदिरा एकादशी के दिन व्रत और पूजन से मोक्ष की प्राप्ति हाती है. व्रत करने वाले को जीवन के अंत में स्वर्ग में स्थान मिलता है.
3. यदि आप अपने पितरों को अधोगति से मुक्ति दिलाना चाहते हैं तो इंदिरा एकादशी व्रत करें.
4. राजा इंद्रसेन ने अपने पितरों की मुक्ति के लिए इंदिरा एकादशी व्रत विधि विधान से किया था. इसकी विधि नारद जी ने उनको बताई थी.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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