Onam 2025: होली-दीवाली की तरह ही है महापर्व ओणम, स्वाद और परंपरा का होता अनोखा संगम, पढ़िए राजा महाबलि की कहानी
कहां और कैसे मनाते हैं महापर्व ओणम
ओणम साध्या या साध्या सिर्फ खाने का नाम नहीं है, ये एक सांस्कृतिक पहचान है. ये मिलजुलकर रहने, राजा महाबलि की मेहमाननवाजी और उनकी वापसी का प्रतीक माना जाता है. इस साल 5 सितंबर को ओणम है और ‘भगवान के अपने देश’ यानी केरल के लोग अपने राजा महाबलि का स्वागत करने और ओणम साध्या के लिए तैयार हैं.
ओणम का त्योहार राजा महाबलि की कथा पर आधारित है. महाबलि एक दयालु और न्यायप्रिय असुर राजा थे. उनके शासन में सब लोग खुश और संपन्न थे. लेकिन उनकी बढ़ती शक्ति से देवता डर गए और उन्होंने भगवान विष्णु से मदद मांगी. भगवान विष्णु वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप लेकर महाबलि से तीन पग भूमि मांगने पहुंचे. महाबलि ने बिना सोचे-समझे हामी भर दी.
ओणम साध्या को परोसे जाने वाले व्यंजन

अवियल- कच्चे केले, सहजन, फलियां, रतालू, गाजर जैसी कई सब्जियों का स्टू, जिसे नारियल और दही के मिश्रण में पकाया जाता है.
पचड़ी- खट्टा-मीठा व्यंजन, जिसमें खीरा, कद्दू या अनानास को दही के साथ पकाकर लाल मिर्च और राई का तड़का लगाया जाता है.
परीप्पू करी- उबली मूंग दाल को मसालों के साथ पकाकर ऊपर से घी, करी पत्ता और राई का तड़का डाला जाता है.
थोरन- बारीक कटी सब्जियां (गाजर, बीन्स या पत्तागोभी) नारियल और हरी मिर्च के साथ भूनकर बनाई जाती हैं.
सांभर- इमली, खास मसालों और कई सब्जियों से बनी चटपटी दाल. इसके साथ रसम भी परोसा जाता है.
ओलन- हल्का और मलाईदार व्यंजन, जिसमें सफेद कद्दू और लाल लोबिया नारियल के दूध व नारियल तेल में पकाए जाते हैं.
पुलिसेरी- हल्की मसालेदार और खट्टी दही करी, जिसे आम या सफेद कद्दू के साथ बनाया जाता है.
कलन- खट्टी और मलाईदार करी, जिसमें दही, कच्चा केला और रतालू मिलाए जाते हैं.
पायसम- साध्या का मीठा अंत. यह खीर जैसी डिश है, जिसे अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है. जैसे- पलाडा पायसम (चावल के आटे से), परिक्कू प्रथमन (मूंग दाल से), आडा प्रथमन (चावल के आटे से).


