Shani Amavasya 2025: परिघ योग में शनि अमावस्या आज, जानें पितरों को प्रसन्न करने की विधि, मुहूर्त, पितृ दोष का होगा नाश
शनि अमावस्या मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त का समय: 04:26 ए एम से 05:10 ए एम तक
अभिजीत मुहूर्त का समय: 11:58 ए एम से 12:49 पी एम
भाद्रपद अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 22 अगस्त, दिन में 11 बजकर 55 मिनट से
भाद्रपद अमावस्या तिथि का समापन: 23 अगस्त, दिन में 11 बजकर 35 मिनट पर
अमावस्या तिथि को पवित्र नदी में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है. ज्यादा से ज्यादा पूजा-पाठ करनी चाहिए, जबकि इस मौके पर कोई भी नया काम नहीं करना चाहिए. शनिश्चरी अमावस्या को लेकर मान्यता है कि जो लोग इस दिन सच्चे भाव से भगवान शनि की पूजा करते हैं और गंगा स्नान करते हैं, उनके सभी पापों का नाश हो जाता है.
शनि अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद पितरों की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर भोग अर्पित करना अच्छा माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त परिवार के सदस्यों को प्राप्त होती है.
वहीं शनि अमावस्या के दिन घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
अगर कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं तो राहुकाल का खास ध्यान दें, इस समय कोई शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. राहुकाल सुबह 9 बजकर 9 मिनट से सुबह 10:46 तक रहेगा. चन्द्रमा सिंह राशि में रहेंगे और सूर्योदय 05:55 प्रातः और सूर्यास्त 06:52 सायं होगा.
इष्टि अनुष्ठान
अमावस्या को ही इष्टि अनुष्ठान भी संपन्न किया जाता है. हिंदू कैलेंडर में इष्टि एवं अन्वाधान का जिक्र है. अन्वाधान अनुष्ठान का विधिवत समापन इष्टि पर होता है. संस्कृत में अन्वाधान का अर्थ अग्निहोत्र यानि हवन या होम करने के बाद पवित्र अग्नि को जलाए रखने के लिए ईंधन जोड़ने की एक परंपरा है. इस दिन वैष्णव एक दिन का उपवास रखते हुए इस क्रिया को करते हैं.
(एजेंसी इनपुट के साथ)


