Hanuman Ji kiske Avtar: हनुमानजी किसके अवतार हैं? जानिए पवन पुत्र को कैसे मिला वानर रूप, पढ़ें रोचक कथा

Hanuman Ji kiske Avtar: हनुमानजी किसके अवतार हैं? जानिए पवन पुत्र को कैसे मिला वानर रूप, पढ़ें रोचक कथा

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Hanuman ji kiske avtar hai: हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं. उनका जन्म अंजना और केसरी के यहां हुआ था. हनुमान जी की पूजा हनुमान चालीसा के साथ करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

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Hanuman Ji kiske Avtar: हनुमानजी किसके अवतार हैं? उन्हें कैसे मिला वानर रूपजानिए, हनुमानजी किसके अवतार हैं? (AI)
Hanuman ji kiske avtar hai: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवताओं को समर्पित है. इसी तरह मंगवलार के दिन हनुमानजी की पूजा और व्रत का विधान है.यह व्रत जीवन के दुखों को दूर करने के लिए किया जाता है. ज्योतिषविदों की मानें तो श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी शिवजी के अवतार हैं. उनकी पूजा हनुमान चालीसा के बिना अधूरी मानी जाती है. इसलिए जो जातक पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसको सभी कार्यों में सफलता मिलती है. साथ ही, अक्षय फलों की भी प्राप्ति होती है. अब सवाल है कि, हनुमान किसके अवतार हैं? हनुमानजी को कैसे मिला वानर रूप? आइए जानते हैं इस बारे में-

किसके अवतार हैं हनुमान जी

धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, हनुमान जी को भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार माना गया है. रुद्र, शिव के रौद्र रूप को संदर्भित करता है और हनुमान जी को भगवान शिव के अंश के रूप में देखा जाता है. हनुमान जी का जन्म अंजना और केसरी के यहां हुआ था, लेकिन उनकी उत्पत्ति भगवान शिव के आशीर्वाद और वायु देव के अंश से जुड़ी है. त्रेता युग में, भगवान राम की सहायता करने और रावण का वध करने में मदद करने के लिए हनुमान जी का अवतार हुआ.

हनुमान जी को कैसे मिला वानर रूप

हनुमान जी पवन पुत्र भी कहे जाते हैं और वानर राज केसरी के पुत्र भी. असल में उनकी माता अंजनि अपने पूर्वजन्म में इंद्रराज के महल में अप्सरा थी. उनका नाम पुंजिकस्थला था. वह बहुत आकर्षक और चंचल स्वभाव की थी. एक बार चंचलता के कारण उन्होंने तपस्या में लीन एक ऋषि को वानर समझकर उनके साथ अभद्र व्यवहार कर दिया, तो ऋषि ने क्रोध में उन्हें श्राप दिया कि वो वानरी का रूप धारण कर लेगी. श्राप सुनकर पुंजिकस्थला को बहुत पछतावा हुआ और उसने ऋषि से क्षमा मांगकर श्राप को वापस लेने के लिए विनती की. उस पर दया कर ऋषि ने कहा कि तुम्हारा वानर रूप भी परम तेजस्वी होगा और तुम एक बहुत ही कीर्तिवान और यशस्वी पुत्र को जन्म दोगी.

यह वरदान मिलने के बाद वह शिवजी की तपस्या करने लगी. शिवजी ने प्रसन्न होकर उसे वरदान मांगने के लिए कहा, तो अंजलि ने उन्हें ऋषि द्वारा मिले श्राप के विषय में बताया और कहा कि इस श्राप से मुक्त होने के लिए मुझे शिव के अवतार को जन्म देना है. इसलिए, हे महादेव! कृपया आप बाल रूप में मेरे गर्भ से जन्म लें. शिवजी ने अंजनी को आशीर्वाद दिया और उनके गर्भ से बजरंग बली के रूप में जन्म लिया.इस प्रकार हनुमान जी ने भगवान महादेव के ग्यारहवें रूद्र अवतार के रूप मे माता अंजना के गर्भ से जन्म लिया और उन्हें वानर रूप मिला.

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Hanuman Ji kiske Avtar: हनुमानजी किसके अवतार हैं? उन्हें कैसे मिला वानर रूप

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