बिना कारण जीवन में आ रही बाधाओं का कारण है पितृ दोष? करें त्रिपिंडी श्राद्ध और पाएं समाधान, जानें नियम

बिना कारण जीवन में आ रही बाधाओं का कारण है पितृ दोष? करें त्रिपिंडी श्राद्ध और पाएं समाधान, जानें नियम

Last Updated:

Tripindi puja ke fayde​ : त्रिपिंडी श्राद्ध केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आत्माओं की शांति और परिवार की सुख-शांति से जुड़ी एक भावनात्मक परंपरा है. जब तक पितरों की आत्मा को मोक्ष नहीं मिलता, उनका प…और पढ़ें

जीवन में आ रही बाधाओं का कारण है पितृ दोष? करें त्रिपिंडी श्राद्धtripindi puja ke fayde
Tripindi puja ke fayde​ : हमारे जीवन में कई बार ऐसा लगता है कि मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही, घर में बिना वजह तनाव बना रहता है या स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहता है. ऐसे हालात में लोग कई बार ज्योतिष से सलाह लेते हैं और वहां से पता चलता है कि किसी पितृ दोष की वजह से जीवन में रुकावटें आ रही हैं. पितृ दोष का मतलब होता है पूर्वजों की अधूरी इच्छाएं या उनके अंतिम संस्कार में कोई गलती. इन्हीं को शांत करने के लिए किया जाता है त्रिपिंडी श्राद्ध. यह श्राद्ध खासतौर पर उन आत्माओं के लिए किया जाता है जो किसी वजह से असंतुष्ट हैं और अभी तक मोक्ष की ओर नहीं जा पाई हैं. आइए जानते हैं कि त्रिपिंडी श्राद्ध क्या होता है, इसका महत्व क्या है और इसे कैसे किया जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

त्रिपिंडी श्राद्ध क्या होता है?
त्रिपिंडी श्राद्ध का मतलब है – तीन पीढ़ियों के पितरों का पिंडदान. इसमें खासतौर पर उन पूर्वजों को पिंड दिया जाता है जिनकी आत्मा किसी वजह से अभी तक शांति नहीं पा सकी है. इस श्राद्ध में ब्रह्मा, विष्णु और शिव की उपस्थिति भी मानी जाती है, इसलिए इसे खास माना जाता है. मान्यता है कि अगर किसी परिवार में कोई पूर्वज नाराज़ है तो वह आने वाली पीढ़ियों को परेशान कर सकता है. ऐसे में त्रिपिंडी श्राद्ध करके उसे शांत किया जाता है ताकि वह परम गति को प्राप्त कर सके.

यह भी पढ़ें – भक्ति का असर जल्दी चाहिए? जानिए कलयुग में किस देवता की पूजा सबसे फलदायक है

क्यों ज़रूरी है त्रिपिंडी श्राद्ध?
अगर किसी की कम उम्र में या अचानक मृत्यु हो जाती है और उनका अंतिम संस्कार सही तरीके से नहीं हुआ हो तो आत्मा भटकती रहती है. ऐसी स्थिति में त्रिपिंडी श्राद्ध करके उस आत्मा को शांति दी जाती है. इसके अलावा अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है तो यह श्राद्ध करवाना बहुत फायदेमंद होता है. यह माना जाता है कि इससे जीवन की कई रुकावटें दूर हो सकती हैं और मन को भी शांति मिलती है.

किन लोगों के लिए किया जाता है यह श्राद्ध?
त्रिपिंडी श्राद्ध उन लोगों के लिए किया जाता है जिनकी असमय मौत हुई हो – जैसे बचपन में, युवावस्था में, किसी हादसे में या जलने जैसे किसी अप्राकृतिक कारण से, अगर किसी परिवार में बार-बार दुःखद घटनाएं हो रही हैं, तो भी यह श्राद्ध करवाना जरूरी माना जाता है.

त्रिपिंडी श्राद्ध कब किया जाता है?
इस श्राद्ध को करने के लिए पितृ पक्ष का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. खासकर अमावस्या के दिन इसे करना बहुत फलदायक होता है. हालांकि, गया जैसे तीर्थस्थलों पर इसे सालभर भी किया जा सकता है, लेकिन पितृपक्ष का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि उस दौरान पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण की उम्मीद करती हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homeastro

जीवन में आ रही बाधाओं का कारण है पितृ दोष? करें त्रिपिंडी श्राद्ध

Source link

Previous post

जन्माष्टमी पर पढ़ें श्रीकृष्ण चालीसा, लड्डू गोपाल हो जाएंगे प्रसन्न, खुशियों से भर जाएगी झोली

Next post

Janmashtami Deepdaan 2025: द्वारका में जन्माष्टमी का चमत्कार और दीपदान की परंपरा, जब समुद्र ने श्रीकृष्ण को किया नमन

You May Have Missed