महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से सूरज को क्यों ढक दिया था? अर्जुन के प्राण कैसे बचे?
इस घटना का ज़िक्र हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से दिए अपने भाषण में भी किया, जो यह बताता है कि आज भी उस समय की रणनीति और धैर्य से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं.
महाभारत के युद्ध का चौदहवां दिन था. अर्जुन ने उस दिन प्रतिज्ञा ली थी कि सूर्य ढलने से पहले वह जयद्रथ का वध करेगा. जयद्रथ वही योद्धा था जिसने द्रौपदी के अपमान में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई थी और अभिमन्यु की मौत के समय अर्जुन को व्यूह में घुसने से रोका था. अर्जुन ने कसम खाई थी कि अगर वह जयद्रथ को मार नहीं पाया, तो स्वयं को खत्म कर देगा.
इस प्रतिज्ञा ने पूरे युद्ध का रुख बदल दिया. कौरव पक्ष ने जयद्रथ की रक्षा के लिए भारी रणनीति अपनाई. उसे व्यूह के बीचोंबीच छिपा दिया गया और सूर्य धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ने लगा. समय निकल रहा था और अर्जुन व्यूह तोड़कर जयद्रथ तक नहीं पहुंच पा रहा था.
ऐसे कठिन समय में भगवान श्रीकृष्ण ने वह अद्भुत कार्य किया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से सूरज को इस तरह ढक दिया कि पूरा मैदान अंधकारमय हो गया. ऐसा प्रतीत होने लगा मानो सूर्य अस्त हो गया हो. कौरव सेना ने मान लिया कि दिन समाप्त हो चुका है और युद्ध रोक दिया गया.
इसका लाभ उठाकर जयद्रथ मैदान में निश्चिंत होकर बाहर आया. तभी श्रीकृष्ण ने सूर्य को पुनः प्रकट किया और अर्जुन को इशारा दिया. अर्जुन ने तत्काल अपना दिव्य बाण चलाया और जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया. वह सिर जाकर उसके पिता की गोद में गिरा और पूर्व शाप के अनुसार, वे भी उसी क्षण जलकर राख हो गए.


