Hal Shashthi 2025 Today: शुभ योग में आज होगी हल षष्ठी पूजा, जानें महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त
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Hal Shashthi 2025: कृष्ण जन्माष्टमी से दो दिन पहले हल षष्ठी का व्रत किया जाता है और यह शुभ तिथि आज है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था. इस दिन महिलाओं संतान की ल…और पढ़ें

Hal Shashthi 2025 Today: आज हल षष्ठी तिथि का व्रत है, जिसे ललई छठ, बलराम जयंती या हरछठ भी कहते हैं. हर वर्ष यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था इसलिए हिंदू धर्म में हल षष्ठी का विशेष महत्व है. भाई बलराम का अस्त्र हल होने की वजह से इस तिथि को हल षष्ठी तिथि कहा जाता है. इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की कुशलता और रोग-निवारण के लिए उपवास रखती हैं और बलराम जी की पूजा करती हैं. हलछठ पर भगवान बलराम के साथ छठ माता की भी पूजा करने का विधान है. आइए जानते हैं हल षष्ठी का महत्व और पूजन विधि…
हल षष्ठी 2025
षष्ठी तिथि का समापन: 15 अगस्त, मध्य रात्रि 2 बजकर 27 मिनट तक
हल षष्ठी व्रत का महत्व
हल षष्ठी का व्रत कृष्ण जी के बड़े भाई बलराम जी के लिए किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन माताएं संतान सुख और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं. इस व्रत को करने से सभी तरह के भय, रोग, दुख व कष्ट दूर हो जाते हैं और घर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है. हल षष्ठी व्रत को मुख्यत: उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है. हल षष्ठी के दिन महुआ की दातुन और महुआ खाने का भी विधान है. इस व्रत में हल से जोते हुए खेत की उपज जैसे गेंहूं, धान, अरहर, मूंग आदि का सेवन नहीं किया जाता. साथ ही दही, दूध, फल और बिना हल से जोते खेत की उपज का ही उपयोग किया जाता है.
हल षष्ठी व्रत 2025 शुभ योग
हल षष्ठी व्रत पूजन मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:24 ए एम से 05:08 ए एम
विजय मुहूर्त: 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन
हल षष्ठी व्रत पूजा विधि
आज महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें. षष्ठी तिथि कार्तिकेय और संतान रक्षा की तिथि मानी जाती है. इसके बाद घर के अंदर या बाहर दीवार पर गोबर से छठ माता का चित्र बनाएं. इसके साथ ही सप्त ऋषि, पशु, हल, किसान आदि का चिंत्र बनाएं. इसके बाद चौकी पर कपड़ा बिछाएं और उस पर कलश स्थापित करें. चौकी पर गणेशजी और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें और फिर गणेश पूजन के साथ पूजा शुरू करें. पूजा में मिट्टी के कुल्हड में ज्वार और महुआ भर लें और एक बर्तन में देवती छेवली रख लें. इसके बाद छठ माता की पूजा करें और कुल्हड और बर्तन की पूजा करें. हल षष्ठी व्रत में सात प्रकार के अनाज और भुने हुए चने का भोग लगाया जाता है. पूजा में भगवान को हल्दी से रंगे आभूषण और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद फल, फूल आदि पूजा से संबंधित चीजें अर्पित करें और आरती करें. इस व्रत में हल से जोते हुए खेत की उपज जैसे गेंहूं, धान, अरहर, मूंग आदि का सेवन नहीं किया जाता. व्रत में केवल दही, दूध, फल और बिना हल से जोते खेत की उपज का ही उपयोग किया जाता है. महिलाएं नदी, तालाब या कुएँ के पास पूजा कर, बलराम जी और देवी
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें


