Parthasarathy Temple: सदियों पुराना है लीलाधर का यह धाम, 5 स्वरूप में विराजते हैं श्रीहरिनारायण, सप्त ऋषियों ने यहीं की थी तपस्या
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Parthasarathy Temple: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आने वाला है और इस मौके पर आज हम आपको भगवान कृष्ण के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां सप्त ऋषियों ने कठोर तपस्या की थी. इस मंदिर में द्रविड़ शैली की अद्भुत व…और पढ़ें

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त दिन शनिवार को मनाया जाएगा. ऐसे में देश-दुनिया के तमाम मंदिरों में इसकी धूम है. भक्त नंदलाल के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं. नारायण के सभी मंदिर जगमगा रहे हैं. श्रीहरिनारायण का एक मंदिर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के त्रिपलीकेन क्षेत्र में स्थित है, जिस मंदिर का नाम श्री पार्थसारथी मंदिर है. भगवान विष्णु के पार्थसारथी स्वरूप को समर्पित यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल अति प्राचीन है.
तमिलनाडु सरकार करती है देखरेख
पार्थसारथी मंदिर का निर्माण
पार्थसारथी मंदिर का निर्माण पल्लव वंश के राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने छठी शताब्दी में करवाया था. बाद में चोल और विजयनगर के राजाओं ने इसका विस्तार किया. मंदिर में भगवान विष्णु के पांच स्वरूपों, पार्थसारथी (कृष्ण), योग नरसिंह, राम, गजेंद्र वरदराज और रंगनाथ की पूजा होती है. यह मंदिर अपनी अनूठी विशेषता के लिए भी जाना जाता है, जहां भगवान कृष्ण को मूंछों के साथ और बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के दिखाया गया है. गर्भगृह में कृष्ण अपनी पत्नी रुक्मिणी, भाई बलराम, पुत्र प्रद्युम्न, पौत्र अनिरुद्ध और सात्यकि के साथ विराजमान हैं. मंदिर परिसर में वेदवल्ली थायर, अंडाल, हनुमान, रामानुज और स्वामी मनवाला मामुनिगल जैसे अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
द्रविड़ शैली की अद्भुत वास्तुकला
यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए बल्कि द्रविड़ शैली की अद्भुत वास्तुकला और समृद्ध इतिहास के लिए भी प्रसिद्ध है. मंदिर की द्रविड़ शैली की वास्तुकला आकर्षक है, जिसमें जीवंत राजगोपुरम और बारीक नक्काशीदार मंडप शामिल हैं. मंडपों पर पौराणिक कथाओं को चित्रित किया गया है, जो इसे और भी भव्य बनाते हैं. मंदिर में साल भर कई उत्सव आयोजित होते हैं, जिनमें बैकुंठ एकादशी और तमिल महीने मार्गाजी (दिसंबर-जनवरी) के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है. इस दौरान लगभग 4,000 श्लोक भगवान की स्तुति में पढ़े जाते हैं. तमिल महीने चित्तिरई (अप्रैल-मई) में श्री पार्थसारथी स्वामी का ब्रह्मोत्सव और उदयवर उत्सव, वैगसी में श्री वरदराजर उत्सव, और आनी (जून-जुलाई) में श्री अझगियासिंगार (नरसिंह) का उत्सव मनाया जाता है.
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें
मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें


