Kajari Teej Vrat Katha: क्या है इस व्रत की कथा, कैसे करता है सौभाग्य और प्रेम की रक्षा
कजरी तीज 2025 की तारीख और शुभ समय
भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि शुरू: 11 अगस्त 2025, सुबह 10:33 बजे
भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि समाप्त: 12 अगस्त 2025, सुबह 8:40 बजे
कजरी तीज व्रत: 12 अगस्त 2025, मंगलवार
कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है. इस दिन महिलाएं सज-धजकर निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को कठोर तप के बाद शिवजी को अपने पति के रूप में पाया था. इस कारण इस दिन का व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम और सौभाग्य लाने वाला माना जाता है.
कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी की कामना से करती हैं. माना जाता है कि व्रत रखने वाली महिलाओं के जीवन में खुशियां और समृद्धि बनी रहती है.
कजरी तीज से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध कथा एक गरीब ब्राह्मण और उसकी पत्नी की है.
एक गांव में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया को ब्राह्मणी ने कजरी तीज का व्रत रखा. उसने अपने पति से पूजा के लिए चने का सत्तू लाने को कहा, लेकिन ब्राह्मण के पास पैसे नहीं थे. पत्नी ने कहा कि चाहे जैसे भी हो, उसे सवा किलो सत्तू चाहिए.
ब्राह्मण ने रोते हुए बताया कि वह चोरी करने नहीं आया, बल्कि पत्नी के व्रत के लिए सत्तू लेने आया है. तलाशी लेने पर उसके पास सिर्फ सत्तू मिला. उसकी नीयत देखकर साहूकार का दिल पिघल गया. उसने ब्राह्मण को सत्तू के साथ गहने, मेहंदी, लच्छा और रुपए देकर सम्मानपूर्वक विदा किया, और उसे अपनी बहन मान लिया.
व्रत विधि
1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
2. भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र की पूजा करें.
3. पूजा में फल, फूल, मेहंदी, लच्छा और सत्तू अर्पित करें.
4. चांद देखने के बाद व्रत खोलें.


