गणेश चतुर्थी कब है? पूजा के लिए ढाई घंटे मुहूर्त, जानें तारीख, चांद निकलने का समय, महत्व

गणेश चतुर्थी कब है? पूजा के लिए ढाई घंटे मुहूर्त, जानें तारीख, चांद निकलने का समय, महत्व

गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. गणेश चतुर्थी को गणेश जयंती के नाम से भी जानते हैं क्योंकि इस दिन गणपत्ति बप्पा का जन्मदिन होता है. माता पार्वती ने इस दिन अपने उबटन से गणेश जी को बनाया था और उनमें प्राण डाले थे. तब से यह तिथि गणेश चतुर्थी के नाम से मनाई जाने लगी. इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा करते हैं. गणेश चतुर्थी पर महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में लोग गणपति बप्पा को अपने घर लाते हैं और पूजा-पाठ करते हैं. उसके बाद उनका विसर्जन होता है. गणेश चतुर्थी को भाद्रपद विनायक चतुर्थी भी कहते हैं. आइए जानते हैं कि गणेश चतुर्थी कब है? गणेश चतुर्थी मुहूर्त क्या है? गणेश चतुर्थी के दिन चांद क्यों नहीं देखते हैं?

गणेश चतुर्थी की सही तारीख

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गणेश चतुर्थी के लिए जरूरी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगी. यह तिथि 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि के आधार पर इस साल गणेश चतुर्थी 27 अगस्त दिन बुधवार को है.

गणेश चतुर्थी मुहूर्त

इस साल गणेश चतुर्थी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 2 घंटे 34 मिनट तक है. गणेश पूजा का शुभ समय दिन में 11 बजकर 5 मिनट से दोपहर 1 बजकर 40 मिनट तक है. इस समय में विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की स्थापना और पूजा विधि विधान से की जाएगी.

गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 28 ए एम से सुबह 05 बजकर 12 ए एम तक है. उस दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है. चतुर्थी का निशिता मुहूर्त 12:00 ए एम से 12:45 ए एम तक है.

उस दिन शुभ योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है, उसके बाद से शुक्ल योग बनेगा. गणेश चतुर्थी के दिन हस्त नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 06 बजकर 04 मिनट तक है, उसके बाद से चित्रा नक्षत्र है.

गणेश चतुर्थी पर चांद निकलने का समय

गणेश चतुर्थी के दिन चन्द्रोदय सुबह में 9 बजकर 28 मिनट पर होगा. चंद्रमा के अस्त होने का समय रात में 8 बजकर 57 मिनट पर है. गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित है. इस दिन चंद्रमा देखने से झूठा कलंक लगता है.

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों तक चलता है. तिथि के अनुसार इसके दिन कम और ज्यादा हो सकते हैं. गणेश चतुर्थी को व्रत और पूजा करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं, उनकी कृपा से विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं. मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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