3 शुभ योग में वरलक्ष्मी व्रत आज, माता लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न? जानें विधि, पूजा मुहूर्त, महत्व

3 शुभ योग में वरलक्ष्मी व्रत आज, माता लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न? जानें विधि, पूजा मुहूर्त, महत्व

वरलक्ष्मी व्रत आज 8 अगस्त शुक्रवार को है. वरलक्ष्मी व्रत के दिन 3 शुभ योग बने हैं. आज वरलक्ष्मी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और आयुष्मान् योग हैं. आज वरलक्ष्मी व्रत के साथ भगवान हयग्रीव का भी जन्मोत्सव है. आज सावन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो शाम 2 बजकर 12 मिनट तक रहेगी. उसके बाद पूर्णिमा शुरू होगी. पंचांग के अनुसार आयुष्मान् योग पूरे दिन, रवि योग 05:46 ए एम से 02:28 पी एम तक और सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 02:28 पी एम से पूर्ण रात्रि तक है. आइए जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में.

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व
वरलक्ष्मी व्रत हर साल सावन शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को होता है. इस दिन धन और समृद्धि की देवी वरलक्ष्मी की पूजा करते हैं. मान्यता है कि देवी वरलक्ष्मी, जो भगवान विष्णु की पत्नी और महालक्ष्मी का एक रूप हैं, अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. उनका प्रादुर्भाव क्षीर सागर से हुआ था और वे दूधिया रंग के वस्त्र धारण करती हैं.

यह वरलक्ष्मी व्रत संतान, जीवनसाथी और सांसारिक सुखों की कामना के लिए किया जाता है. खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में विवाहित महिलाएं इसे श्रद्धापूर्वक करती हैं, हालांकि पुरुष भी इसे कर सकते हैं.

वरलक्ष्मी व्रत शुभ मुहूर्त
सिंह लग्न पूजा मुहूर्त- सुबह 06:29 ए एम से सुबह 08:46 ए एम तक
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त- दोपहर 01:22 पी एम से दोपहर 03:41 पी एम तक
कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त- शाम 07:27 पी एम से रात 08:54 पी एम तक
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त- रात 11:55 पी एम से मध्य रात्रि 01:50 ए एम तक

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वरलक्ष्मी व्रत और पूजा विधि
वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि में पवित्र धागा (दोरक) बांधना और मिष्ठान्न अर्पित करना शामिल है, जो दीपावली की महालक्ष्मी पूजा से मिलता-जुलता है. सुबह के साथ ही शाम में भी माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इसके लिए देवी श्री वरलक्ष्मी का ध्यान करते हुए पूजन आरंभ करना चाहिए. श्री वरलक्ष्मी प्रतिमा का ध्यान मंत्र ‘क्षीरसागर-संभूतां क्षीरवर्ण-समप्रभाम्, क्षीरवर्णसमं वस्त्रं दधानां हरिवल्लभाम्’ है.

पंचामृत से वरलक्ष्मी का स्नान कराएं, इसके पश्चात जल अर्पित करें. माता के स्नान के बाद उन्हें वस्त्र चढ़ाकर इत्र, रोली, सिंदूर लगाएं और माला फूल के साथ नैवेद्य आदि अर्पित करें. दीप-धूप जलाकर माता की प्रार्थना करें, व्रत कथा सुनें और भक्ति के भाव के साथ आरती करें. माता वरलक्ष्मी की कृपा से आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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