3 शुभ योग में वरलक्ष्मी व्रत आज, माता लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न? जानें विधि, पूजा मुहूर्त, महत्व
वरलक्ष्मी व्रत का महत्व
वरलक्ष्मी व्रत हर साल सावन शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को होता है. इस दिन धन और समृद्धि की देवी वरलक्ष्मी की पूजा करते हैं. मान्यता है कि देवी वरलक्ष्मी, जो भगवान विष्णु की पत्नी और महालक्ष्मी का एक रूप हैं, अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. उनका प्रादुर्भाव क्षीर सागर से हुआ था और वे दूधिया रंग के वस्त्र धारण करती हैं.
वरलक्ष्मी व्रत शुभ मुहूर्त
सिंह लग्न पूजा मुहूर्त- सुबह 06:29 ए एम से सुबह 08:46 ए एम तक
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त- दोपहर 01:22 पी एम से दोपहर 03:41 पी एम तक
कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त- शाम 07:27 पी एम से रात 08:54 पी एम तक
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त- रात 11:55 पी एम से मध्य रात्रि 01:50 ए एम तक
वरलक्ष्मी व्रत और पूजा विधि
वरलक्ष्मी व्रत की पूजा विधि में पवित्र धागा (दोरक) बांधना और मिष्ठान्न अर्पित करना शामिल है, जो दीपावली की महालक्ष्मी पूजा से मिलता-जुलता है. सुबह के साथ ही शाम में भी माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इसके लिए देवी श्री वरलक्ष्मी का ध्यान करते हुए पूजन आरंभ करना चाहिए. श्री वरलक्ष्मी प्रतिमा का ध्यान मंत्र ‘क्षीरसागर-संभूतां क्षीरवर्ण-समप्रभाम्, क्षीरवर्णसमं वस्त्रं दधानां हरिवल्लभाम्’ है.
(एजेंसी इनपुट के साथ)


