3 मार्च को कर रहे हैं होलिका दहन, चंद्र ग्रहण के अशुभ प्रभाव से घर को ऐसे करें शुद्ध, फिर

3 मार्च को कर रहे हैं होलिका दहन, चंद्र ग्रहण के अशुभ प्रभाव से घर को ऐसे करें शुद्ध, फिर

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Chandra Grahan On Holika Dahan 2026: होलिका दहन के दिन पड़ रहे चंद्र ग्रहण ने श्रद्धालुओं के बीच खास उत्सुकता बढ़ा दी है. जहां एक ओर होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि इस संयोग के दौरान किस प्रकार पूजा-पाठ और उपाय करके संभावित अशुभ प्रभावों को दूर किया जा सकता है. आइए जानते हैं…

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Chandra Grahan On Holika Dahan 2026: 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है और इस दिन भारत के कुछ हिस्सों में होलिका दहन भी किया जाएगा. चूंकि होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है इसलिए पूजा-पाठ के सभी कार्यों में विशेष सावधानी और शुद्धता का ध्यान रखना होगा. चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा और 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 23 मिनट से शुरू हो जाएगा. सूतक काल में पूजा-पाठ समेत कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं इसलिए होलिका दहन के पूजन और होलिका दहन के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है.

चंद्र ग्रहण और होलिका दहन 2026
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है. पौराणिक कथा के मुताबिक भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु की कृपा से होलिका दहन हुआ था. इसी कारण इस दिन अग्नि की परिक्रमा करने और पूजा करने का विशेष महत्व है. वहीं चंद्र ग्रहण को राहु-केतु का प्रभाव माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति के मन और स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, लेकिन धार्मिक आस्था रखने वाले लोग इसे विशेष सावधानी का समय मानते हैं.

  • ग्रहण काल में भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का नाम स्मरण करना शुभ माना जाता है. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या गायत्री मंत्र का जाप मानसिक शांति देता है.
  • होलिका दहन की अग्नि की तीन या सात परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें. परिक्रमा के समय गेहूं की बालियां या नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है.
  • चूंकि सूतक काल सुबह 6:23 से शुरू हो जाएगा इसलिए भोजन पहले ही बना लें या फिर ग्रहण के समापन के बाद बनाएं.
  • ग्रहण के बाद स्नान कर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना लाभकारी बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इससे ग्रह दोष शांत होते हैं.
  • ग्रहण के दौरान होलिका दहन से जुड़े पूजा पाठ से संबंधित कोई भी कार्य ना करें.
  • ग्रहण के बाद होलिका दहन की पूजा से जुड़े सामान पर गंगाजल से छिड़काव के बाद ही करें.
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल का छिड़काव कर घर की शुद्धि करें, इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
  • परंपरागत मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के भीतर रहकर आराम करना चाहिए और किसी भी प्रकार की धारदार वस्तु के उपयोग से बचना चाहिए.

ज्योतिषाचार्यों की राय
धर्माचार्यों का कहना है कि आस्था के साथ किए गए उपाय व्यक्ति को मानसिक बल प्रदान करते हैं. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी तरह की अफवाह से बचें और नियमित दिनचर्या बनाए रखें. इस प्रकार, होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आस्था और वैज्ञानिक सोच के संतुलन के साथ अगर श्रद्धालु पूजा-पाठ और दान-पुण्य करें तो मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय दूर होता है.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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