26 दिसंबर को सफला एकादशी, विष्णु पूजा के समय जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, हर शुभ कार्य में मिलेगी सफलता!

26 दिसंबर को सफला एकादशी, विष्णु पूजा के समय जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, हर शुभ कार्य में मिलेगी सफलता!

सफला एकादशी का व्रत 26 दिसंबर को रखा जाएगा. सफला एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. यह अंग्रेजी कैलेंडर के दिसंबर या जनवरी माह में पड़ता है. इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करते हैं. इस व्रत के पुण्य प्रभाव एवं श्रीहरि की कृपा से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है. इस बार सफला एकादशी के दिन सुकर्मा योग बना है, यह एक शुभ योग है. कहा जाता है कि आपको किसी भी शुभ कार्य में सफलता की चाह है तो उससे पूर्व सफला एकादशी का व्रत करें. पूजा के समय सफला एकादशी की कथा पढ़ें. आपको मनमुताबिक सफलता प्राप्त हो सकती है. उज्जैन के महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी बता रहे हैं सफला एकादशी व्रत कथा के बारे में.

सफला एकादशी व्रत कथा
एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पौष कृष्ण एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन करने का अनुरोध किया. इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इस एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जानते हैं क्योंकि यह सफलता प्रदान करने वाली मानी गई है. विष्णु कृपा से यह व्रत रखने वाले व्यक्ति के पाप मिटते हैं और उसके मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसकी कथा कुछ इस प्रकार से है-

चंपावती के राजा महिष्मान के 4 पुत्र थे. उनका सबसे बड़ा बेटा लुंपक दुराचारी, लोभी, कामी था. वह मांस और मदिरा का सेवन करने वाला था. वह संतजनों, देवी, देवता आदि का अपमान करता रहता था. उसके इस व्यवहार से राजा महिष्मान काफी परेशान और चिंतित रहते थे. एक दिन वह उससे इतना तंग आ गए कि उसे महल और राज्य से बाहर कर दिया.

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वह अपनी गलत आदतों के कारण नगर में चोरी करने लगा था, जिससे वहां के नागरिक भी परेशान हो गए थे. लुंपक पास के ही एक जंगल में रहता था. वहां पर एक पीपल के पेड़ की पूजा नगरवासी करते थे. वह उस पेड़ के नीचे रहने लगा. पौष कृष्ण दशमी की रात उसे काफी सर्दी लग रही थी, कपड़े कम थे, सर्द से उसका शरीर अकड़ गया. फिर भी वह सोया रहा. अगले दिन एकादशी थी, सूर्योदय हुआ, सूरज की तेज किरणें जब उसके शरीर पर पड़ीं और गर्मी होने लगी तो उसकी नींद टूटी.

उसे काफी भूख और प्यास लगी हुई थी. वह पानी और कुछ खाने की तलाश में जंगल के अंदर चला गया. वह काफी कमजोर हो गया था. इस वजह से कोई शिकार नहीं कर पाया. कुछ फल तोड़े और उसी पीपल के पेड़ के नीचे आकर बैठ गया. सूर्यास्त के बाद अंधेरा हो गया था. उसने फल को एक ओर रख दिया और कहा कि हे प्रभु! यह फल आपको ही अर्पित है, आप स्वयं ही इसे खाओ. उस रात वह सो नहीं पाया और जागता रहा.

एकादशी की रात्रि उसका जागरण हो गया. रात में वह अपने पाप कर्मों पर पश्चाताप कर रहा था. उसने भगवान से पूर्व पाप कर्मों के लिए क्षमा भी मांगी. अनजाने में ​किए गए एकादशी व्रत से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने आशीर्वाद से लुंपक के पापों को मिटा दिया. उस समय आकाशवाणी हुई, जिसमें उसे बताया गया कि भगवान विष्णु ने उसके पापों को नष्ट कर दिया है. तुम अपने पिता के पास राजमहल में जाओ और कामकाज में उनकी मदद करो. राजा की गद्दी संभालो.

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यह सुनकर लुंपक ने भगवान विष्णु के नाम का जयकारा लगाया. फिर प्रसन्न मन से महल लौट गया. पूरी बातें जानकर उसके पिता ने भी उसे माफ कर दिया और उसे वहां का राजा बना दिया. लुंपक धार्मिक कार्यों में समय देने लगा और राजपाट चलाने लगा. उसका विवाह हुआ और उसे संतान सुख प्राप्त हुआ. जीवन के अंत में उसे भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हुई. जो व्यक्ति विधि विधान से सफला एकादशी का व्रत रखता है, उसके पाप मिटते हैं और मोक्ष मिलता है. कार्य में सफलता प्राप्त होती है.

सफला एकादशी 2024 मुहूर्त और पारण
पौष कृष्ण एकादशी तिथि का शुभारंभ: 25 दिसंबर, बुधवार, रात 10:29 बजे से
पौष कृष्ण एकादशी तिथि का समापन: 26 दिसंबर, गुरुवार, देर रात 12:43 बजे पर
सुकर्मा योग: 25 दिसंबर, प्रात: काल से रात 10:42 बजे तक
सफला एकादशी पारण समय: 27 दिसंबर, शुक्रवार, सुबह 7:12 बजे से 9:16 बजे तक

Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu, Religion

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