1 छोटी सी गलती बिगाड़ सकती है पूजा का फल, जानिए हनुमान जी को चोला चढ़ाने का सही तरीका
Hanuman ji ko Chola Chadhana: मंगलवार या शनिवार की सुबह जैसे ही मंदिरों में घंटियों की आवाज गूंजती है, कई भक्त एक ही भावना लेकर पहुंचते हैं संकटों से मुक्ति और मन की शांति. इसी भावना के साथ हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा भी जुड़ी है. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि श्रद्धा तो पूरी होती है, पर विधि अधूरी रह जाती है. कई लोग बिना सही जानकारी के चोला चढ़ा देते हैं और बाद में मन में सवाल रह जाता है क्या पूजा सही तरीके से हुई? यही वजह है कि इस विषय को समझना जरूरी हो जाता है, ताकि भक्ति के साथ सही विधि भी जुड़ सके और पूजा का पूर्ण फल मिल सके.
हनुमान जी को चोला चढ़ाने का सही समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है. खासकर ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय चोला चढ़ाना अधिक फलदायी माना जाता है. हालांकि, जिन लोगों के लिए सुबह संभव न हो, वे शनिवार की शाम को भी यह पूजा कर सकते हैं. मंदिरों में अक्सर शाम के समय भी चोला चढ़ाने की परंपरा देखने को मिलती है.
चोला चढ़ाने के पीछे की मान्यता और फायदे
हनुमान जी को चोला चढ़ाना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक गहरी आस्था का प्रतीक है. माना जाता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
नकारात्मकता से मिलती है सुरक्षा
कई भक्तों का अनुभव है कि नियमित रूप से चोला चढ़ाने से मानसिक डर और अनजानी चिंताएं कम होती हैं.
ग्रह दोषों में राहत
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह पूजा शनि और मंगल के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक होती है.
मनोकामनाएं होती हैं पूरी
भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई इस पूजा से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं और जीवन में स्थिरता आती है.
चोला चढ़ाने के लिए जरूरी सामग्री
हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की जरूरत होती है. इसमें नारंगी सिंदूर, चमेली का तेल या घी, चांदी या सोने का वर्क, इत्र, जनेऊ, लाल कपड़ा (लंगोट) और चमेली के फूल शामिल हैं. इन सामग्रियों का चयन भी साफ-सुथरा और शुद्ध होना चाहिए, क्योंकि पूजा में शुद्धता का विशेष महत्व होता है.
हनुमान जी को चोला चढ़ाने की सही विधि
-पूजा की शुरुआत हनुमान जी की प्रतिमा को गंगाजल या साफ पानी से स्नान कराने से होती है. इसके बाद उन्हें साफ कपड़े से पोंछा जाता है.
-अब सिंदूर और चमेली के तेल को मिलाकर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है. इस मिश्रण को सबसे पहले हनुमान जी के बाएं पैर से लगाना शुरू करें और धीरे-धीरे पूरे शरीर पर नीचे से ऊपर की ओर चढ़ाएं.
-इसके बाद जनेऊ पहनाएं, चांदी का वर्क और वस्त्र अर्पित करें. यदि संभव हो, तो 11 या 21 पीपल के पत्तों पर “श्रीराम” लिखकर अर्पित करें.
-अंत में चने, गुड़ और मिठाई का भोग लगाएं, धूप-दीप जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें. पूजा का समापन आरती के साथ करें और प्रसाद ग्रहण करें.
चोला चढ़ाते समय मंत्र का महत्व
कौन सा मंत्र करें जाप?
चोला चढ़ाते समय “सिन्दूरं रक्तवर्णं च सिन्दूरतिलकप्रिये . भक्तयां दत्तं मया देव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम ..” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
अगर चोला चढ़ाने में गलती हो जाए तो क्या करें?
कई बार जल्दबाजी या जानकारी की कमी के कारण पूजा में छोटी-मोटी गलतियां हो जाती हैं. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले सच्चे मन से हनुमान जी से क्षमा मांगें. इसके बाद हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना लाभकारी माना जाता है. अगर चोला चढ़ाने में बड़ी गलती हो गई हो, तो “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करते हुए प्रतिमा को गंगाजल से पुनः शुद्ध किया जा सकता है.


