होलिका दहन 2026: ऐसे तैयार करें अपनी पूजा की थाली, जानें संपूर्ण विधि-विधान
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प्रसिद्ध ज्योतिषी सिद्धार्थ एस कुमार (न्यूमरोवाणी) के अनुसार, होलिका दहन का अर्थ पौराणिक कथाओं से कहीं गहरा है. वे इसे एक ‘एनुअल रिसेट’ यानी वार्षिक शुद्धि मानते हैं. यह प्रक्रिया हमें सिखाती है कि अंत प्राकृतिक हैं और नई जगह बनाने के लिए पुरानी चीजों का भस्म होना जरूरी है.
जब भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था के सामने होलिका का वरदान और हिरण्यकश्यप का अहंकार राख हो गया, तब दुनिया ने जाना कि विश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं है. होलिका दहन की यह पवित्र अग्नि हमें याद दिलाती है कि सत्य को डराया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं. 2026 में यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे मानसिक और भावनात्मक बोझ को उतारने का एक शानदार अवसर बनकर आ रहा है.
होलिका दहन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष होलिका दहन मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. दिक पंचांग के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:22 बजे से रात 8:55 बजे तक रहेगा. परंपरा को मानने वालों के लिए इस निश्चित समय अवधि (मुहूर्त) में अनुष्ठान करना विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाने का समय होता है.
एक ‘एनुअल रिसेट’ के रूप में होलिका की रात
प्रसिद्ध ज्योतिषी सिद्धार्थ एस कुमार (न्यूमरोवाणी) के अनुसार, होलिका दहन का अर्थ पौराणिक कथाओं से कहीं गहरा है. वे इसे एक ‘एनुअल रिसेट’ यानी वार्षिक शुद्धि मानते हैं. साल भर हम कई तरह की निराशाएं, अनकही बातें और कड़वाहट अपने मन में जमा कर लेते हैं. यह अग्नि हमें मौका देती है कि हम उन सभी नकारात्मक भावनाओं को बिना किसी ड्रामे के स्वीकार करें और उन्हें वहीं छोड़ दें. यह रात कर्मकांड की पूर्णता से ज्यादा शुद्ध नियत के बारे में है.
पूजा की थाली
होलिका दहन की पूजा बहुत ही सरल लेकिन अर्थपूर्ण होती है. आपकी थाली में ये चीजें शामिल होनी चाहिए:
अनुष्ठान की विधि
अग्नि का मनोविज्ञान: परिवर्तन का प्रतीक
अग्नि कभी बहस नहीं करती; वह सिर्फ रूप बदल देती है. जब हम किसी चीज को राख में बदलते हुए देखते हैं, तो हमारे अवचेतन मन में एक ‘क्लोजर’ (अंत) का अहसास होता है. सिद्धार्थ कुमार कहते हैं कि यह प्रक्रिया हमें सिखाती है कि अंत प्राकृतिक हैं और नई जगह बनाने के लिए पुरानी चीजों का भस्म होना जरूरी है. यह अग्नि हमें बताती है कि जो अहंकार से प्रेरित है, वह स्थायी नहीं है.
2026 का विशेष प्रभाव: अंतर्मुखी ऊर्जा
ज्योतिषीय दृष्टि से, 2026 का होलिका दहन थोड़ा अंतर्मुखी रहने वाला है. इस दौरान पुरानी बातें और गलतफहमियां फिर से उभर सकती हैं. ऐसे में अहंकार के वश में आकर प्रतिक्रिया देने के बजाय, यह समय क्षमा और परिपक्वता दिखाने का है. इस साल की अग्नि उत्सव से ज्यादा स्पष्टता खोजने के बारे में है.
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दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें
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