होलाष्टक 2025 कब से? जानिए होलिका दहन की सही तिथि और इन 8 दिनों में क्या करें क्या ना करें

होलाष्टक 2025 कब से? जानिए होलिका दहन की सही तिथि और इन 8 दिनों में क्या करें क्या ना करें

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Holashtak 2025 Date: होलाष्टक इस बार 7 मार्च से शुरू हो रहे हैं और 13 मार्च को खत्म हो रहे हैं. होलिका दहन के बाद 14 मार्च को धुलेंडी है, इस दिन लोग खूब रंग से खेलते हैं. होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अ…और पढ़ें

होलिक दहन का पर्व 13 मार्च 2025 दिन गुरुवार को मनाया जाएगा

हाइलाइट्स

  • होलाष्टक 7 मार्च से 13 मार्च तक रहेगा.
  • होलिका दहन 13 मार्च को होगा.
  • होलाष्टक में शुभ कार्य वर्जित हैं.

होलाष्टक 7 मार्च से प्रारंभ हो रहे हैं और इनका समापन 13 मार्च को होलिका दहन के साथ ही हो जाएगा. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक प्रारंभ हो जाते हैं और फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि यानी होलिक दहन तक होलाष्टक खत्म हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश आदि कार्य करना वर्जित हैं. होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता. आइए जानते हैं होलिका दहन की सही तिथि और इन 8 दिन क्या करें क्या ना करें…

होलिका दहन 2025 कब है?
होलिक दहन का पर्व 13 मार्च 2025 दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. होलिका दहन का इस बार शुभ मुहूर्त 11 बजकर 26 मिनट से 14 मार्च को सुबह 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। होलिका दहन के लिए लगभग 1 घंटे का समय मिलेगा. होलिक दहन पर भद्रा का विचार किया जाता है. होलिका दहन के दिन भद्रा सुबह 10 बजकर 35 मिनट से रात 11 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. इसके बाद ही होलिका दहन किया जाएगा.

होली 2025 कब है?
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 14 मार्च को 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इस वजह से होलिका दहन 13 मार्च को और होली का पर्व 14 मार्च दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. होली के दिन पूरे देश में रंगों की होली खेली जाती है इसलिए इस पर्व को रंग वाली होली के नाम से भी जाना जाता है.

आखिर क्यों अशुभ माना जाता है होलाष्टक?
होलाष्टक का संबंध भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्चप से जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा हिरण्यकश्चप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को मारने के लिए फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि तय की थी. पूर्णिमा तिथि से आठ दिन पहले हिरण्यकश्चप ने प्रहलाद को कष्ट और यातनाएं दी थीं ताकि वह डर जाए और भगवान विष्णु की भक्ति के मार्ग से हट जाए. लेकिन तमाम कष्टों के बाद भी प्रहलाद ने भगवान विष्णु की भक्ति करना नहीं छोड़ा इस वजह से आठवें दिन यानी पूर्णिमा तिथि को बुआ होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोदी में बैठाया और भस्म करने की कोशिश की. लेकिन भक्त प्रहलाद को तो कुछ नहीं हुआ और होलिका आग में जलकर भस्म हो गई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा तिथि से पहले के आठ दिन भक्त प्रहलाद को जो यातनाएं और कष्ट दिए थे, वे कष्ट ही होलाष्टक कहलाते हैं. इस वजह से आठ दिन कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किया जाता.

होलाष्टक में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?
फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तिथि तक की अवधि को होलाष्टक माना जाता है. होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं, इस वजह से वे अशुभ स्थिति में आ जाते हैं. ग्रहों की स्थिति अशुभ होने की वजह से इस दौरान कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. ग्रहों की स्थिति अनुकूल ना होने की वजह से व्यक्ति के अंदर निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है इसलिए व्यक्ति के मन को रंग और उत्साह की तरफ ध्यान आकर्षित करवा दिया जाता है.

होलाष्टक 2025 में क्या करें?

1- होलाष्टक के 8 दिनों में पूजा-पाठ जप-तप आदि शुभ कार्य करना सही माना जाता है. इस अवधि में भगवान विष्णु और भगवान शिव के साथ कुल देवी देवताओं की पूजा की जाती है.

2- होलाष्टक में अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा करना उत्तम रहता है और हर रोज ऋण मोचन स्त्रोत, विष्णु सहस्रनाम, हनुमान चालीसा या श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए.

3- होलाष्टक में पितरों को हर रोज तर्पण दें और उनका ध्यान करें. साथ ही ग्रहों की शांति के पूजा या यज्ञ भी करवा सकते हैं.

4- होलाष्टक में अगर संभव हो सके तो मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा करना चाहिए.

होलाष्टक 2025 में क्या ना करें?
1- होलाष्टक में शुभ व मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं, ऐसा करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित है.
2- होलाष्टक में घर या वाहन खरीदना या बेचना नहीं चाहिए. साथ ही नया बिजनस स्टार्ट भी नहीं करना चाहिए. ऐसे कार्य आप होली के बाद ही कर सकते हैं.
3- होलाष्टक में क्रोध ना करें, झूठ ना बोलें, वाद-विवाद से बचें. साथ ही किसी भी तरह के अनैतिक कार्यों से दूर रहें.

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होलाष्टक 2025 कब? होलिका दहन की तिथि और होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ

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