हर जातक की कुंडली में लगती है शनि की साढ़ेसाती, किन राशियों पर होता है सबसे ज़्यादा असर? किसको मिलती है राहत?
Shani Sadesati Effects: कभी न कभी आपने भी सुना होगा “साढ़ेसाती चल रही है, इसलिए दिक्कतें बढ़ गई हैं.” दफ्तर में काम का दबाव, घर में अनबन, अचानक खर्चे… और लोग सीधा निष्कर्ष निकाल लेते हैं शनि नाराज़ हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय और कर्मफल का ग्रह माना गया है. वे बिना वजह कष्ट नहीं देते, बल्कि व्यक्ति को उसके कर्मों का परिणाम दिखाते हैं. लेकिन जब शनि साढ़ेसाती की अवस्था में आते हैं, तो जीवन की रफ्तार सचमुच बदलती हुई महसूस होती है. यह समय किसी धीमी लेकिन गहरी परीक्षा जैसा होता है, जो व्यक्ति के धैर्य, मेहनत और मानसिक मजबूती को परखता है. सवाल यह है कि किन राशियों पर इसका असर ज्यादा दिखता है और इससे बचाव कैसे किया जाए? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
साढ़ेसाती क्या है और क्यों मानी जाती है चुनौतीपूर्ण?
साढ़ेसाती तब शुरू होती है जब शनि जन्म कुंडली की चंद्र राशि से एक राशि पहले प्रवेश करते हैं. इसके बाद वे चंद्र राशि और फिर अगली राशि से गुजरते हैं. इस पूरी यात्रा में लगभग साढ़े सात साल का समय लगता है, इसलिए इसे साढ़ेसाती कहा जाता है.
इस दौरान व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव, करियर में बाधाएं या पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ महसूस हो सकता है. हालांकि हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है. कुछ लोग इसे आत्मविकास का दौर मानते हैं, तो कुछ इसे संघर्ष का समय.
क्या सचमुच सब कुछ बुरा ही होता है?
यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है. कई ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि शनि का असली उद्देश्य सुधार और अनुशासन सिखाना है. जो लोग इस समय को गंभीरता से लेते हैं, वे आगे चलकर ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बनते हैं.
किन राशियों पर असर ज्यादा माना जाता है?
मकर राशि (Capricorn Horoscope)
मकर शनि की अपनी राशि है. ऐसे में जब साढ़ेसाती का प्रभाव पड़ता है, तो जिम्मेदारियां अचानक बढ़ सकती हैं. करियर में बड़े निर्णय लेने पड़ सकते हैं. कई लोगों को प्रमोशन के साथ अतिरिक्त काम का बोझ भी मिलता है. घर-परिवार में भी अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं. हालांकि यह समय मकर राशि वालों के लिए स्थिरता की नींव भी रखता है. यदि वे धैर्य और अनुशासन बनाए रखें, तो लंबे समय में उन्हें लाभ मिल सकता है.
कुंभ राशि (Aquarius Horoscope)
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय आत्ममंथन का होता है. अक्सर देखा गया है कि इस दौरान दोस्ती के दायरे बदलते हैं, प्राथमिकताएं नई बनती हैं और जीवन के लक्ष्य स्पष्ट होते हैं. अचानक आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं. लेकिन यही समय उन्हें परिपक्व भी बनाता है. कई कुंभ राशि के लोग इसी अवधि में अपना करियर मोड़ते हैं या नई दिशा चुनते हैं.
आम जीवन में साढ़ेसाती के संकेत
कई लोग बताते हैं कि इस दौरान छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ जाता है. खर्चे बढ़ते हैं या बचत कम हो जाती है. कभी नौकरी में अस्थिरता, तो कभी रिश्तों में दूरी महसूस होती है. लेकिन यह हर बार नकारात्मक ही हो, ऐसा जरूरी नहीं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग शनिवार को तेल दान करते हैं या जरूरतमंदों की मदद करते हैं. शहरों में युवा पीढ़ी इसे आत्मअनुशासन और वित्तीय योजना से जोड़कर देखती है.
साढ़ेसाती में क्या करें?
सबसे पहले डर को मन से निकालें. शनि को कर्म का प्रतीक माना गया है, इसलिए मेहनत और ईमानदारी सबसे बड़ा उपाय है. नियमित दिनचर्या, समय पर काम और अनुशासित जीवनशैली इस दौर को आसान बना सकती है. धार्मिक आस्था रखने वाले लोग शनिवार को दान-पुण्य, पीपल वृक्ष की पूजा या शनि मंत्र जाप करते हैं. वहीं व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो वित्तीय योजना बनाना, अनावश्यक खर्चों से बचना और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है. आखिरकार, साढ़ेसाती कोई सजा नहीं, बल्कि जीवन का एक अध्याय है जो सिखाता है, तराशता है और आगे बढ़ने की तैयारी कराता है.


