हनुमानजी के दरबार में मनोकामना पूर्ति के लिए लगती है अर्जी, करने पड़ते हैं ये काम, प्रेतरा
हनुमानजी के दरबार में मनोकामना पूर्ति के लिए लगती अर्जी, प्रेतराज का अनोखा भोग
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Hanuman Jayanti 2026: 2 अप्रैल को हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन भक्त व्रत रखकर हनुमानजी की पूजा अर्चना करते हैं और हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करते हैं. हनुमान जयंती के मौके पर हम आपको देवभूमि के एक ऐसे हनुमानजी के मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां मनोकामना पूर्ति के लिए अर्जियां लगती हैं.
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का पर्व हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 2 अप्रैल दिन गुरुवार को है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह शुभ दिन अंजनी पुत्र बजरंगबली के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भक्त व्रत रखकर विधि विधान के साथ हनुमानजी की पूजा अर्चना करते हैं और दान-पुण्य व भजन कीर्तन करते हैं. हनुमान जयंती के मौके पर आज हम आपको देवभूमि उत्तराखंड में मौजूद हनुमानजी के ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जो राजस्थान के बालाजी के धाम की तर्ज पर बनाया गया है. आइए हनुमान जयंती के मौके पर जानते हैं हनुमानजी के इस मंदिर के बारे में…

बालाजी धाम की तर्ज पर बनाया गया – देवभूमि उत्तराखंड अपने पौराणिक मंदिरों और उनकी अनोखी कहानी-चमत्कारो के लिए प्रसिद्ध है. इन्हीं में से एक है देहरादून जिले के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम. यह मंदिर राजस्थान के प्रसिद्ध बालाजी धाम की तर्ज पर बनाया गया है. श्री बालाजी धाम मंदिर जीवन में चल रही नकारात्मकता को दूर करने के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर भक्तगण नकारात्मक शक्तियों, संकटों या बुरी ऊर्जा से मुक्ति के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. श्रद्धालु यहां पर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं.

मनोकामना पूर्ति के लिए करें यह काम – देहरादून के झाझरा में स्थित श्री बालाजी धाम श्रद्धा और आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. इन दिनों हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और हनुमानजी से मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त मांगते हैं. मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार के दिन की गई प्रार्थना और अर्जी से फल मिलता है. मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में एक बार अर्जी लगाई जाती है और सात बार भोग लगाया जाता है.
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हनुमानजी को लगता है इस चीज का भोग – मंदिर की खास बात ये है कि यहां पर भक्तगढ़ बालाजी महाराज को लड्डू और भैरव बाबा को बताशा (या उड़द दाल से जुड़ा प्रसाद) अर्पित करते हैं, जबकि प्रेतराजजी के लिए घी, नारियल और बूरा अर्पित किया जाता है. मंदिर की स्थापना बाबा रामकृष्ण दास बर्फानी ने साल 1957 में की थी. बालाजी धाम का प्रबंध बाबा बाल रामदास हठयोगी महाराज द्वारा किया जाता है. इस मंदिर में मुख्य रूप से बालाजी के बाल स्वरूप और भैरव बाबा प्रेत सरकार, भोलेनाथ, राधा कृष्ण और मां भगवती दुर्गी की भी पूजा होती है. मंदिर में एक बड़ा सा पेड़ है और इस पेड़ पर हजारों की संख्या में बालाजी को चोला चढ़ाया जाता है.

हनुमान जयंती का महत्व – देशभर में हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई जाती है. भक्त सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर हनुमानजी के दर्शन कर रहे हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. माना जाता है कि इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, जो शक्ति, भक्ति और निष्ठा के प्रतीक हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की उपासना से भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.

हनुमानजी पूरा करते हैं हर इच्छा – हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ, राम नाम संकीर्तन और भंडारे का आयोजन प्रमुख रूप से किया जाता है. कई स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिसमें भक्त हनुमान जी की झांकी के साथ कीर्तन करते हुए चलते हैं. श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर हनुमान जी को सिंदूर, लाल चोला, चमेली के तेल और लड्डू का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इसी आस्था के कारण हनुमान जयंती को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है.


