सड़क से महल में पहुंचाती है गुरु की महादशा, पर आपके लिए शुभ या अशुभ? यहां समझें ज्योतिषीय गणना, करें ये उपाय

सड़क से महल में पहुंचाती है गुरु की महादशा, पर आपके लिए शुभ या अशुभ? यहां समझें ज्योतिषीय गणना, करें ये उपाय

रांचीः देवगुरु बृहस्पति की महादशा 16 वर्ष तक चलती है. इसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है. क्योंकि बृहस्पति सभी देवी-देवताओं के गुरु हैं और उनकी अमृत-दृष्टि देवताओं को भी दुर्लभ है. जब यह महादशा आती है तो आमतौर पर लोग जीवन में मांगलिक कार्य और तरक्की की उम्मीद करते हैं, क्योंकि इस समय ज्ञान का भंडार खुलता है और बिगड़ा हुआ व्यक्ति भी सही रास्ते पर आता है. रांची के जाने-माने ज्योतिष आचार्य संतोष कुमार चौबे ने इस संबंध में लोकल 18 को विस्तार से बताया है.

गुरु की महादशा इनके लिए अशुभ
हालांकि गुरु की महादशा सभी के लिए शुभ नहीं होता है. आचार्य चौबे बताते हैं कि हर महादशा सबके लिए समान रूप से शुभ नहीं होती. यदि आपकी कुंडली में गुरु पूरी तरह से पीड़ित हों, तो यही शुभ मानी जाने वाली महादशा व्यक्ति को राजा से रंक बना सकती है, भयंकर बीमारियां दे सकती है और उसे सड़क पर ला सकती है. गुरु तब पीड़ित माने जाते हैं जब वे 6, 8 या 12वें भाव में स्थित हों, या शनि, राहु-केतु जैसे क्रूर ग्रहों की दृष्टि में हों, या अपने शत्रु राशि/नक्षत्र में बैठे हों.

ऐसी स्थिति में जैसे ही गुरु की दशा शुरू होती है, जातक को सबसे पहले बड़ी रोग होने की संभावना रहती है. जिसमें विशेष रूप से किडनी या लिवर संबंधी गंभीर समस्याएं (जैसे किडनी फेल) देखने को मिली हैं. इसके बाद कई वित्तीय संकट (फाइनेंशियल प्रोबलम) आते हैं. जिससे महादशा के शुरुआती 5-7 साल इतने कष्टदायक होते हैं कि व्यक्ति को महसूस होता है कि उसकी जिंदगी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है, सेहत, पैसा और नौकरी सब कुछ खत्म हो चुका है.

पिक्चर अभी बाकी है
आचार्य चौबे कहते हैं कि यहां आकर कहानी समाप्त नहीं होती, बल्कि पिक्चर अभी बाकी है. दरअसल, गुरु का मूल स्वभाव ज्ञान देना है और वह आपको मिलेगा ही. जो तकलीफें आपने काटी हैं, वह आपके पूर्व कर्मों का फल है, लेकिन इस मुश्किल दौर में आपको ज्ञान का प्रकाश मिलता है. पहले 5-7 साल की तड़प और मुश्किल के बाद जातक को जिंदगी की सच्चाई का पता चलता है. बीमारी या संकट के माध्यम से व्यक्ति यह समझता है कि कौन अपना और कौन पराया है, और इस शरीर का क्या महत्व है. यह मुश्किल समय आपको जीवन की सच्चाई दिखाकर सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है.

चूंकि गुरु की महादशा 16 साल की होती है, यदि आपने शुरुआती 5-7 साल कष्ट झेल लिया है, तो परेशान न हों. क्योंकि इसके साथ आपको जबरदस्त जीवन का ज्ञान मिलेगा, जो कई लोग पूरी ज़िंदगी निकालने के बाद भी नहीं समझ पाते. इतना ही नहीं गुरु की दशा आपको भारत के लगभग सारे प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा का सौभाग्य प्रदान करेगी और दशा जाते-जाते आपको नौकरी में भी अच्छी खासी तरक्की मिलेगी.

जातक करें ये उपाय
पीली वस्तुओं का दान: हर गुरुवार को पीले रंग की चीजों का दान करना शुभ होता है, जैसे पीला दाल, पीला वस्त्र, या पढ़ाई-लिखाई का सामान (कॉपी, किताब, पेन) दान करना.

बड़ों का सम्मान: सबसे ज़रूरी उपाय यह है कि आप घर में या बाहर, उम्र में आपसे जो भी बड़ा है (चाहे वह एक साल ही बड़ा क्यों न हो), उसे पूरा सम्मान दें और उनका आशीर्वाद लें.

चौबे बताते हैं कि गुरु बड़ों का अपमान बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते हैं. यदि आप ईमानदारी से ये उपाय करते हैं, तो आपका गुरु आपको वह सब कुछ देगा जिसकी आपने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की होगी.

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