शुभ योग में वरुथिनी एकादशी व्रत आज, जानें महत्व, पूजन विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती और पारण क
Varuthini Ekadashi Vrat 2026 Today: आज वरुथिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है, हर वर्ष वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और श्रीहरि की विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. पद्मपुराण में वरुथिनी एकादशी को मोक्षदायक माना गया है और इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही इस दिन श्रीहरि के पांचवे अवतार वामन अवतार की पूजा करने का विधान है. इस बार वरुथिनी एकादशी पर शुभ योग और शुक्ल योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी का महत्व, पूजा विधि व मुहूर्त और पारण का समय…
वरूथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में कष्टों, बाधाओं और दुर्भाग्य से मुक्ति पाना चाहते हैं. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर फल मिलता है. यह व्रत व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.
वरूथिनी एकादशी व्रत 2026 आज
एकादशी तिथि की शुरुआत – 13 अप्रैल, सुबह 1 बजकर 16 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन – 14 अप्रैल, सुबह 1 बजकर 08 मिनट तक
उदिया तिथि को मानते हुए वरूथिनी एकादशी का व्रत आज किया जाएगा.
पारण का समय – 14 अप्रैल, सुबह 6 बजकर 54 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक. वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को पारण 14 अप्रैल को किया जाएगा.
वरूथिनी एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 06:44 पी एम से 07:07 पी एम
वरूथिनी एकादशी 2026 शुभ योग
शुभ योग में पड़ रही वरूथिनी एकादशी का यह पावन अवसर भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय माना जा रहा है. वरूथिनी एकादशी पर शुभ योग और शुल्क योग बन रहा है. साथ शनि भी उदय रहने वाले हैं और मीन राशि में सूर्य, बुध, शनि और मंगल ग्रह की युति बन रही है, जिससे चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग, आदित्य मंगल योग, त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.
वरूथिनी एकादशी पूजा विधि
– आज ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र पहनें और हाथ में अक्षत व फूल रखकर व्रत का संकल्प लें.
– पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापना करें और चारों तरफ गंगाजल से छिड़काव करें.
– विष्णुजी को पीले फूल, तुलसी पत्र, पंचामृत और पीले वस्त्र अर्पित करें. फिर चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें.
– एकादशी के दिन 21 तुलसी दल भगवान विष्णु को अवश्य अर्पित करें, श्रीहरि की पूजा तुलसी के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है.
– तुलसी की माला से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार सुबह और शाम को जप करें.
– देसी घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें .
– दिनभर व्रत रखें, फलाहार या निर्जला.
– रात्रि में श्रीहरि नाम कीर्तिन व जागरण करना अत्यंत शुभ माना गया है.
भगवान विष्णु के मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और ॐ नमो नारायणाय
विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्
शांताकारं मंत्र
शांताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकांतं कमल नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।
विष्णुजी की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥


