शनिवार का दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता
शनिदेव की पूजा के लिए समर्पित है. शनिदेव एक ऐसे देव हैं, जो लोगों को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि एक ऐसे ग्रह हैं, जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जरूर आते हैं. वह साढ़ेसाती और ढैय्या के रूप में आकर लोगों को उनके फल देते हैं. जो गलत करता है, उसे अनेक प्रकार के कष्टों से दंडित करते हैं, जो अच्छे कर्म करता है, उस पर कृपा बरसाते हैं. इसलिए कहा जाता है कि उनकी दृष्टि से कोई बच नहीं सकता है. कथाओं के अनुसार, लंका का राजा रावण, जिसने
शनिदेव को बंदी बना रखा था, जब हनुमान जी ने उनको मुक्त कराया तो रावण पर शनि की दृष्टि वक्र हुई और उस समय से उसका बुरा वक्त प्रारंभ हो गया. आइए जानते हैं कि शनिदेव कौन हैं? शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है? शनिदेव के माता, पिता, भाई और बहन कौन हैं?
कौन हैं शनिदेव?
भगवान शिव के आशीर्वाद से शनिदेव को ग्रहों में स्थान मिला और उनको न्याय का देवता कहा गया. वे न्याय प्रिय हैं. वे लोगों के साथ हमेशा न्याय करते हैं. वे अपने पिता सूर्यदेव को भी गलत कार्यों के लिए दंडित किए थे.
1. शनिदेव को ग्रहों में सातवां स्थान मिला है.
2. शनिदेव का रंग काला है. वे शनि लोक में निवास करते हैं.
3. शनिदेव का वाहन भैंसा, कौआ और गिद्ध माना गया है.
4. शनिदेव त्रिशूल, गदा और धनुष धारण करते हैं.
5. शनिदेव का वार शनिवार है. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन व्रत और पूजा करते हैं.
शनिदेव के माता-पिता और भाई-बहन
शनिदेव की माता का नाम छाया और पिता ग्रहों के राजा सूर्य देव हैं. शनिदेव की बहन का नाम भद्रा है. शनिदेव के सौतेले भाई यमराज और सौतेली बहन यमुना हैं. इनको यम और यमी के नाम से भी जानते हैं.
शनिदेव का जन्म
कथा के अनुसार, शनिदेव का जन्म हुआ तो वे काले रंग के और कमजोर से थे. सूर्यदेव को पता चला कि वे पिता बने हैं, तो वे मिलने के लिए पहुंचे. सूर्यदेव ने जब शनिदेव को देखा तो खुश नहीं हुए. उनके मन में यह शंका हुई कि उनका रंग गोरा है तो उनका पुत्र काला कैसे हो गया? इस वजह से वे शनिदेव की माता छाया के चरित्र पर शक करने लगे. इसे छाया काफी दुखी हुईं और शनिदेव से भेदभाव करने के लिए सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया.
शनिदेव जब गर्भ में थे, तक माता छाया ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. इस वजह से वह कमजोर और काली पड़ गई थीं. उसका प्रभाव शनिदेव पर भी पड़ा, जिससे उनका रंग काला हो गया.
शनिदेव को न्याय का देवता क्यों कहते हैं?
जब शनिदेव को इस बात का पता चला तो वे अपने पिता पर क्रोधित हो गए. उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या कि ताकि वे अपने पिता को माता के प्रति गलत व्यवहार के लिए दंडित कर सकें. भगवान शिव जब प्रसन्न हुए तो उन्होंने शनिदेव को नक्षत्र मंडल में स्थान देकर दंडाधिकारी बना दिया. सूर्य देव के इस व्यवहार के कारण ही पिता और पुत्र में नहीं बनती है. शनिदेव और सूर्य देव में 36 का आंकड़ा है.
शिव कृपा से शनिदेव बने कर्मफलदाता
शिव कृपा मिलने से शनिदेव कर्मफलदाता बन गए. उन्हें नवग्रह में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. चाहें देव हों, मनुष्य, राक्षस, गंधर्व, किन्नर, सभी को शनिदेव की दृष्टि का सामना करना पड़ता है. उनको कर्मों के अनुसार फल भुगतना पड़ता है.
जब शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा आती है, तो लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. धन संकट, नौकरी में समस्या, मान-सम्मान में कमी, गृह क्लेश, कोट कचहरी केस, दुर्घटना आदि शनिदेव की वक्र दृष्टि के संकेत हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)