यूनेस्को ने दिया दिवाली को सम्मान, अब भारत का यह पर्व दुनिया में संस्कृति और एकता का प्रतीक बना

यूनेस्को ने दिया दिवाली को सम्मान, अब भारत का यह पर्व दुनिया में संस्कृति और एकता का प्रतीक बना

Diwali Intangible Cultural Heritage : दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों, उम्मीदों और रोशनी से भरी वह परंपरा है जिसे भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में करोड़ों लोग मनाते हैं. घरों में दीये जलाना, रंग-बिरंगी सजावट, मिठाइयों की ख़ुशबू और परिवार के साथ बिताए खास पल इन सबमें दिवाली की अपनी अनोखी चमक है. लंबे समय से यह पर्व भारतीय संस्कृति की ताकत और सौहार्द का प्रतीक बना हुआ है. लोगों के मन में यह त्योहार एक ऐसे मौके के रूप में दर्ज है, जब हर तरफ उजाला होता है और हर कोई नई शुरुआत का स्वागत करता है. इस बार दिवाली से जुड़े गर्व को एक नई ऊंचाई मिली है. यूनेस्को ने इसे अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया है. यह सम्मान सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक चमक की वैश्विक पहचान है जिसे भारत सदियों से सँजोए हुए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि यह कदम दुनिया भर में दिवाली की पहचान को और मजबूत करेगा.

दिवाली पहले से ही भारत में एक विशाल उत्सव के रूप में स्थापित है, लेकिन अब इसे जो अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है, वह पूरी संस्कृति के लिए गर्व का अवसर है. ऐसी पहचान मिलने का मतलब है कि इस पर्व की परंपराएं, अनुभव और सामाजिक जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और जीवंत रहेंगे. रोशनी और विश्वास का यह त्योहार अब सच में पूरी दुनिया का हिस्सा बन चुका है.

दिवाली की वैश्विक पहचान क्यों खास है?
दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, भारत में हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है. इसके साथ सिख और जैन समुदाय भी गहरा लगाव रखते हैं और बड़े उत्साह के साथ इसे मनाते हैं. पाँच दिनों तक चलने वाला यह उत्सव अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार अमावस्या की रात को मनाया जाता है, जब लोग अपने घरों और आस-पड़ोस को दीयों और रोशनी से जगमगा देते हैं.

यूनेस्को की सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि यह परंपरा सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं, एकता और सकारात्मकता का गहरा संदेश देती है. इससे पहले भारत की 15 परंपराएं इस सूची में शामिल थीं, जैसे योग, कुंभ मेला और कोलकाता की दुर्गा पूजा. अब दिवाली भी उसी सम्मानित समूह का हिस्सा बन गई है.

यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची – इस बार क्या-क्या शामिल हुआ?
यूनेस्को हर साल अलग-अलग देशों की परंपराओं, कलाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का अध्ययन कर उन्हें सूची में जोड़ता है. इस साल की सूची में कई दिलचस्प और विविध परंपराएं शामिल की गईं, जिनमें से कुछ हैं:

-मिस्र का लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड कोशरी
-इराक में रमज़ान के दौरान खेला जाने वाला खेल अल-मुहैबिस
-इथियोपिया के वोलाइटा समुदाय का गिफाता नव वर्ष उत्सव
-साइप्रस की प्राचीन कमांडारिया वाइन
-घाना का हाईलाइफ़ संगीत और नृत्य
-चिली की सर्कस परंपराएं
-आइसलैंड के स्विमिंग पूल
-और बहुप्रतीक्षित इतालवी व्यंजन

इतालवी भोजन दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय है. पिज़्ज़ा, पास्ता, जेलाटो और रिसोट्टो जैसे स्वाद दुनिया के हर कोने में पसंद किए जाते हैं. इटली ने इन व्यंजनों को अपने जीवन और संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हुए उनका नामांकन भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है.

Diwali

दिवाली की सांस्कृतिक ताकत
दिवाली के यूनेस्को सूची में आने का सबसे बड़ा मतलब यह है कि इस त्योहार को अब वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर माना जाएगा. इससे उन परंपराओं को सुरक्षा मिलती है जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं जैसे दीये जलाना, रंगोली बनाना, परिवारों का साथ आना, घरों की सफाई, उपहार देना और समाज में सकारात्मकता फैलाना.

यह पहचान एक तरह से दुनिया को यह बताती है कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें कितनी गहरी हैं और उसकी परंपराएं मानवता के साझा अनुभव में कितनी खास भूमिका निभाती हैं.

दिवाली का यूनेस्को की सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक शक्ति और दुनिया में उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह सिर्फ एक त्योहार का सम्मान नहीं, बल्कि उन भावनाओं का सम्मान है जो लोगों को जोड़ती हैं. यह रोशनी अब सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की धरोहर बन चुकी है.

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