यहां पर भगवान राम को ब्रह्महत्या के पाप से मिली थी मुक्ति, मुगल भी कर चुके हैं इस मंदिर पर
श्रीराम को यहीं मिली थी ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति, मुगल भी कर चुके हैं हमला
Last Updated:
Shri Kardameshwar Mahadev Temple: शिव नगरी काशी की महिमा के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन एक काशी दक्षिण भारत में भी मौजूद है. मान्यता है कि यहां दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. बताया जाता है कि भगवान राम की यहां आकर ही ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी और मुगलों ने इस मंदिर पर कई बार हमला भी किया है. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में…
Shri Kardameshwar Mahadev Temple: देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी के कण-कण में उनका वास माना जाता है. छोटे-बड़े हर एक मंदिर की अपनी एक दिव्यता और अद्भुत भक्ति में लिपटी मान्यता है. महादेव को समर्पित ऐसा ही एक मंदिर है, जो उनके अराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र से भी जुड़ा है. काशी के दक्षिणी भाग में स्थित श्री कर्दमेश्वर महादेव मंदिर एक अद्भुत और प्राचीन शिवालय है. मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद रावण वध से लगे ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए यहां महादेव के दर्शन किए थे. यह मंदिर मुगलों के 17वीं सदी के विनाशकारी हमलों में भी बच गया और आज भी अपनी मूल गरिमा को बनाए हुए है. आइए जानते हैं महादेव के इस मंदिर के बारे में…
भगवान राम को यहीं मिली थी पापों से मुक्ति
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर काशी का सबसे प्राचीन बचा हुआ शिव मंदिर माना जाता है. कर्दम ऋषि ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, इसलिए इसका नाम कर्दमेश्वर पड़ा. काशी पंचकोशी परिक्रमा (25 किलोमीटर लंबी पवित्र यात्रा) का यह पहला प्रमुख पड़ाव माना जाता है. तीर्थयात्री यहीं से अपनी यात्रा शुरू करते हैं. मान्यता है कि मंदिर शिखर के दर्शन मात्र से व्यक्ति देव ऋण से मुक्त हो जाता है. किंवदंतियों के अनुसार, रावण वध के बाद भगवान राम को ब्रह्महत्या का दोष लगा. गुरु वशिष्ठ की सलाह पर राम-सीता यहां आए और महादेव के दर्शन व परिक्रमा करने के बाद उन्हें पाप से मुक्ति मिली.
कर्दम ऋषि के आंसुओं से बना है कुंड
यह मंदिर नागर शैली में बना है और पंचरथ डिजाइन का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसमें एक चबूतरा है, जिस पर गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ, अंतराल, महामंडप और अर्द्धमंडप स्थित हैं. मंदिर पूर्व मुखी है. दीवारों पर दिव्य नर्तकियों, संगीतकारों, सांपों और पौराणिक जानवरों की सुंदर नक्काशी है, जो 6वीं-7वीं शताब्दी की बताई जाती है. मंदिर के पास कर्दम कुंड है. मान्यता है कि यह कुंड कर्दम ऋषि के आंसुओं से बना है, बाद में 18वीं शताब्दी में बंगाल की रानी भवानी ने इसे ठीक कराया.
मंदिर पर मुगलों ने किया था हमला
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है. 11वीं शताब्दी में गहड़वाला वंश के चंद्रदेव ने आक्रमण के बाद काशी को फिर से स्थापित किया. यह मंदिर 12वीं शताब्दी का बताया जाता है और मुगलों के विनाश से बचकर 17वीं सदी तक अपनी मूल संरचना बनाए रखने वाला काशी का एकमात्र मंदिर है. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे प्राचीन व ऐतिहासिक स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1956 के तहत संरक्षित किया हुआ है.
कैसे पहुंचे श्री कर्दमेश्वर महादेव मंदिर?
मंदिर प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुला रहता है. सुबह-शाम और रात में आरती होती है. प्रवेश निःशुल्क है. दर्शन के लिए सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा माना जाता है. मंदिर वैष्णो नगर कॉलोनी, कंचनपुर, कंदवा क्षेत्र में स्थित है. वाराणसी शहर से ऑटो, टैक्सी या प्राइवेट वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है. वहीं, वाराणसी जंक्शन या लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर लगभग 30-45 मिनट में मंदिर तक पहुंच सकते हैं.
About the Author

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें


