मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर करें दीपदान, स्नान और माता लक्ष्मी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Margashirsha Purnima 2025 : मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है. इसे धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक पावनता का प्रतीक माना गया है. यह दिन विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान करने, दान करने और देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए उपयुक्त होता है. कहते हैं कि इस दिन किया गया प्रत्येक पुण्य कार्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और घर में सुख-समृद्धि लाने का अवसर भी प्रदान करती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से स्नान और दान के लिए उत्सुक रहते हैं. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में लाभ मिलता है. इसके अतिरिक्त, इस दिन दान करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2025 का स्नान-दान शुभ मुहूर्त
इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त माना गया है. 4 दिसंबर 2025 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:24 बजे से सुबह 06:18 बजे तक रहेगा. हालांकि, पूर्णिमा तिथि इस समय के बाद आरंभ होगी. इसलिए, पूर्णिमा तिथि के अंतर्गत स्नान और दान का शुभ मुहूर्त सुबह 06:54 बजे से सुबह 09:51 बजे तक रहेगा. इस समय पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने से पुण्य का फल अधिक मिलता है.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दान करने की विधि
पूर्णिमा के दिन दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन आप अपनी क्षमता अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और धन का दान कर सकते हैं. इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को गर्म कपड़े, कंबल या अन्य उपयोगी वस्तुएँ भी प्रदान की जा सकती हैं. दान करते समय मन में सच्चाई और भक्ति भावना होना आवश्यक है. ऐसा करने से देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है.
दीपदान की प्रक्रिया
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दीपदान का विशेष महत्व है. इसके लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए. पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है. यदि यह संभव न हो तो घर पर भी गंगाजल का प्रयोग कर स्नान किया जा सकता है. स्नान के बाद दीपक जलाकर घर या मंदिर में दीपदान करें और इस दौरान “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें. यह कार्य मानसिक शांति के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन किए गए व्रत और पूजा के कई लाभ बताए गए हैं. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. चंद्रमा की रौशनी में स्नान करने से शारीरिक रोगों का नाश होता है.
इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा विशेष लाभकारी होती है. इससे घर में धन, सुख और समृद्धि आती है. मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर किया गया दान और शुभ कार्य अक्षय फल देता है, यानी इसका पुण्य कभी खत्म नहीं होता. मां लक्ष्मी और चंद्र पूजन से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर क्या करें
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
2. पवित्र नदियों में स्नान या गंगाजल का प्रयोग करें.
3. दीपक जलाकर दीपदान करें.
4. दान करें – अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, धन, गर्म कपड़े.
5. माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा करें.
6. इस दिन मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करने से पुण्य का फल और अधिक प्राप्त होता है.
मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दिन केवल पूजा और दान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और जीवन में खुशहाली लाने का अवसर भी है. इस दिन किए गए कर्म और दान का प्रभाव जीवन भर व्यक्ति के साथ रहता है और उसे धर्म, भक्ति और समृद्धि की ओर अग्रसर करता है.


