महाभारत का सबसे भयंकर घेरा,जयद्रथ को बचाने के लिए द्रोण ने रचा चक्रशकटव्यूह,कितना था बड़ा
जयद्रथ रक्षा के लिए द्रोण ने बनाया चक्रगर्भ शकट व्यूह
जब सिंधुराज जयद्रथ को पता चला कि अर्जुन ने उसके वध की प्रतिज्ञा ली है तो वह डर गया. कुरुक्षेत्र के मैदान में तब द्रोणाचार्य ने जयद्रथ से कहा कि तुम कर्ण, भूरश्रवा, शल्य, वृषसेन, अश्वत्थामा, कृपाचार्य के साथ मुझ से 6 कोस यानि 20 किलीमीटर दूरी पर जाकर खड़े हो जाओ. जयद्रथ की रक्षा के लिए द्रोणाचार्य ने चक्रगर्भ शकट व्यूह की रचना की.
कैसे हुई थी चक्रशकट व्यूह की रचना?
चक्रशकट व्यूह के पिछले हिस्से में पद्म नामक गर्भव्यूह बनाया था, जिसको भेदना लगभग असंभव था. उस पद्मव्यूह के बीच के हिस्से में एक गूढ़ व्यूह भी बनाया गया था. पुत्र वध के प्रतिशोध की आग में जल रहे अुर्जन को रोकने के लिए द्रोणाचार्य चक्रशकट व्यूह बनाकर खड़े थे.
- सूचीमुख व्यूह के मुख्य भाग में महान धनुर्धर कृतवर्मा थे, तो उनके पीछे काम्बोजराज और जलसंध तैनात थे.
- उनके बाद कौरवों में ज्येष्ठ दुर्योधन और अंगराज कर्ण अपने रथ पर सवार थे.
- इनके बाद 1 लाख ऐसे योद्धा थे, जो युद्ध में मरते दम तक लड़ने वाले थे. इन सबको शकटव्यूह के मुख्य भाग की रक्षा की जिम्मेदारी थी.
- उनके पीछे विशाल सेना के साथ जयद्रथ सूचीव्यूह के बगल में खड़ा था.
- शकटव्यूह के मुख पर यानि मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वयं द्रोणाचार्य थे और उनके पीछे भोज थे, जो द्रोणाचार्य की रक्षा करते थे.
दिल्ली-कोलकाता महानगर से भी बड़ा था चक्रशकट व्यूह
महाभारत में चक्रशकट व्यूह का जो वर्णन है, उसके अनुसार चक्रशकट व्यूह की लंबाई 12 गव्यूति यानि 24 कोस और चौड़ाई 5 गव्यूति यानि 10 कोस थी. वर्तमान समय में किलोमीटर को ध्यान में रखकर गणना करें तो एक कोस में 3.33 किलोमीटर होता है. इस आधार पर चक्रशकट व्यूह की लंबाई करीब 80 किलोमीटर हुई और उसकी चौड़ाई 33 किलोमीटर से अधिक थी. इस चक्रशकट व्यूह का क्षेत्रफल 2,664 वर्ग किलोमीटर हुआ.
इस आधार पर आप अनुमान लगा सकते हैं कि वह कितना बड़ा था. दिल्ली का दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 1,483 से 1,484 वर्ग किलोमीटर है, वहीं कोलकाता महानगर क्षेत्र लगभग 1,886 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.
जयद्रथ की सुरक्षा में 1 लाख घुड़सवार, 60 हजार रथ
जब द्रोणाचार्य जयद्रथ को चक्रशकट व्यूह में जाने को कहते हैं, तब वर्णन है कि उसके साथ एक लाख घुड़सवार, 60 हजार रथ, 14 हजार हाथी और 21 हजार कवचधारी पैदल सैनिक थे. वह द्रोणाचार्य से 6 कोस की दूरी पर खड़ा था. 6 कोस यानि लगभग 20 किलोमीटर की दूरी.


