महाकुंभ के दौरान आसमान में होगी दुर्लभ घटना, लगेगी 9 ग्रहों की परेड, जानें क्‍या होगा 12 राश‍ियों पर प्रभाव

महाकुंभ के दौरान आसमान में होगी दुर्लभ घटना, लगेगी 9 ग्रहों की परेड, जानें क्‍या होगा 12 राश‍ियों पर प्रभाव

Last Updated:

ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ मधु प्रिया प्रसाद बताती हैं कि कुंभ, देव गुरु बृहस्‍पति और सूर्य के ऊर्जा उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस बार 144 वर्षों के बाद महाकुंभ में 12 तारीख से 9 ग्रह एक ही कतार में आ रहे हैं. इसी…और पढ़ें

कुंभ, देव गुरु बृहस्‍पति और सूर्य के ऊर्जा उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस समय दुनिया का सबसे बड़ा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम हो रहा है. ‘महाकुंभ’ स‍िर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्‍कि ये श्रद्धा और भारतीय संस्‍कृति का महापर्व है. गंगा, यमुन और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम पर आयोजित होने वाले इस मेले में करोड़ों श्रद्धालु और भक्त आस्‍था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. महाकुंभ मेला हर 12 साल में एक बार प्रयागराज में आयोजित होता है, लेकिन 2025 का महाकुंभ यूं तो कई मायनों में खास है. 2025 का महाकुंभ विशेष है क्योंकि इसमें ऐसे खगोलीय संयोग हो रहे हैं जो 144 वर्षों में एक बार होते हैं.

प्रस‍िद्ध ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ मधु प्रिया प्रसाद बताती हैं कि सनातन ऋषियों ने जल स्रोतों पर खगोलीय पिंडों के द्वारा ऊर्जा के अवशोषण और विकिरण के प्रभाव की गणना सालों पहले कर ली थी. इसी गणना के आधार पर कुंभ ,अर्ध कुंभ और महाकुंभ देव गुरु वृहस्पति के 12 राशियों में घूमने के आधार पर क‍िया है. कुंभ 12 वर्षों में 1 बार होता है, वहीं अर्ध कुंभ 6 वर्षों में और महाकुंभ 144 वर्षों में आता है.

144 साल बाद बन रही है ग्रहों की ऐसी स्‍थ‍िति
इस बार 144 वर्षों के बाद महाकुंभ में 12 तारीख से 9 ग्रह एक ही कतार में आ रहे हैं. इसी वजह से ये महाकुंभ, अमृत महाकुंभ की श्रेणी में आ गया है. ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ मधु प्रिया प्रसाद बताती हैं कि बुध, शनि, शुक्र, गुरु, मंगल, नैपचून और यूरेनस जनवरी से एक सीध में रहेंगे. इसका व्यापक प्रभाव देश दुनिया और राशियों पर पड़ेगा. ऐसा दुर्लभ सयोग 1962 में हुआ था और भविष्य में 2050 में होगा. 28 फरवरी तक ये सारे ग्रह एक सीध में आ जाएगे ये संयोग एक अद्भुत अवसर है जिसे हमें समझने और इसका ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ उठाने की कोशिश करनी चाहिए. चाहे आप ज्योतिष के प्रति आस्थावान हों या न हों, इस समय का उपयोग आत्मनिर्माण और मानसिक शांति के लिए करना बेहद लाभकारी हो सकता है. यह समय बदलाव, नये अवसरों और समृद्धि की ओर एक कदम बढ़ाने का हो सकता है. अगर आकाश में देखा जाए तो ये 9 ग्रह दक्षिण-पश्चिम से पूर्व के ओर देखे जा सकते हैं यानी मकर कुंभ मीन मेष वृष मिथुन राशि क्षेत्र में. इन ग्रहों द्वारा ऊर्जा का प्रवर्तन सबसे ज्‍यादा कर्क, सिंह, कन्या और वृश्चिक राशियों पर पड़ेगा.

A rare celestial alignment happen in the sky during Mahakumbh 2025

महाकुंभ में लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. (image- PTI)

क्‍यों इन 4 नद‍ियों के क‍िनारे होता है कुंभ मेला?
ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ मधु प्रिया प्रसाद आगे कहती हैं, कुंभ, देव गुरु बृहस्‍पति और सूर्य के ऊर्जा उत्सव के रूप में मनाया जाता है. देवगुरु बृहस्‍पति जब कुंभ राशि में विचरण करते है और ग्रहों के राजा सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में होते हैं, तो कुंभ का ऊर्जा के स्‍त्रोत का विसर्जन सबसे ज्‍यादा हरिद्वार के गंगा में होता है. वहीं जब सूर्य और बृहस्‍पति कुंभ से सप्तम सिंह राशि में गोचर करते हुए सबसे ज्‍यादा ऊर्जा का उत्सर्जन करते है तो इसके विकिरण का मुख्य केंद्र कुंभ राशि होता है. तब नासिक में गोदावरी नदी पर इसका प्रभाव सबसे ज्‍यादा होता है. मान्याता के अनुसार ग्रहों के विशेष कोणीय अवस्था के कारण नदियो के जल में औषधीय प्रभाव के कारण विशेष ग्रहीय स्थिति में स्नान करने से अमृत फल की प्राप्ति होती है. ऐसे ही सूर्य मेष राशि में और बृहस्‍पति, सिंह राशि में हो तो मेष राशि को सबसे अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है तब उज्जैन के शिप्रा नदी के स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है. वृष राशि में बृहस्‍पति और सूर्य का गोचर जब मकर राशि में होता है तब जो कुंभ लगता है वो मकर राशि के सूर्य पर बृहस्पति के दृष्टि क्षेत्र में आ जाने के कारण प्रयाग राज में इस महान पर्व का आयोजन होता है.

A rare celestial alignment happen in the sky during Mahakumbh 2025

आकाश में देखा जाए तो ये 9 ग्रह दक्षिण-पश्चिम से पूर्व के ओर देखे जा सकते हैं. (image- PTI)

ग्रहों की इस स्‍थ‍िति का असर कई हालातों पर भी पड़ने वाला है. रूस और युक्रेन के बीच युद्ध और बढ़ने की संभवना है. ऐसा मंगल के 21 जनवरी को मिथुन राशि में प्रवेश करते ही हो सकता है और ये 5 अप्रेल तक बना रहेगा. भारत के भी पड़ोसी राष्ट्रों के साथ वाद-विवाद के हालात बढ़ सकते हैं. लेकिन शुभ संकेत ये है कि विश्व आर्थव्यवस्था में तेजी आएगी. वही कुंभ स्नान से लाभान्वित होने वाले जातको को इन ग्रहीय ऊर्जा के भंडार से रोग मुक्ति म‍िलेगी. साथ ही जीवन के प्रति नये दृष्टिकोण में भी इजाफा होगा. देश में आध्यात्मिकता के क्षेत्र में नये अनुसंधान में तेजी आएगी. शनिवार मौनी अमावस्या के दिन कुंभ स्नान विशेष फलदायी रहेगा.

homeastro

महाकुंभ के दौरान आसमान में होगी दुर्लभ घटना, लगेगी 9 ग्रहों की परेड

Source link

Previous post

तकदीर पलट देगी घर की इस दिशा में रखी तिजोरी, नौकरी-कारोबार में भी होगी तरक्की

Next post

सिग्नेचर में छिपा है सेहत का राज, हस्ताक्षर के पहले, मध्य और अंतिम भाग तक जानें सब कुछ, कैसे हेल्थ को करता है प्रभावित?

You May Have Missed