भक्त की सहायता के लिए खुद कोर्ट में वकील बनकर पहुंचे थे महादेव, अंग्रेजों ने करवाया था बाबा बैजनाथ मंदिर का निर्माण
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Baba Baijnath Mandir Madhya Pradesh: आपने भगवान शिव के कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे, लेकिन आज हम आपको उन मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका निर्माण और रखरखाव दोनों अंग्रेजों ने करवाया. जब तक अंग्रेज यहां रहे, तब तब इस मंदिर में पूजा अराधना होती रही. यहां आज भी कई ऐसे चमत्कार होते हैं, जिससे लोगों को विश्वास यहां दिन पर दिन बढ़ रहा है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में…
Baba Baijnath Temple Agar Malwa: महाशिवरात्रि आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हुए हैं. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व आने वाला है और यह शुभ तिथि हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. भगवान शिव को समर्पित यह दिन शिव भक्तों के लिए उमंग वाला रहता है. आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां अपने ईष्ट देव पर भक्तों का विश्वास इतना होता है कि समय आने पर भगवान खुद उनकी मदद करने पहुंच जाते हैं और अपने होने का सबूत देते हैं. भक्त खुद महसूस करते हैं कि उनकी मदद उनके ईष्ट देव ने की है, लेकिन क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि भगवान खुद अदालत में चलकर गए और केस का रुख पलटकर रख दिया? इस जीवांत घटना के साक्षी कई भक्त रहे हैं और आज भी कई चमत्कारों के साथ मध्य प्रदेश की धरती पर बाबा बैजनाथ भक्तों की हर मनोकामना को पूरा कर रहे हैं.
कई चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर
महाकाल की धरती मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में बाबा बैजनाथ ने अपने चमत्कारों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया है. भक्तों का बाबा पर इतना दृढ़ विश्वास है कि वे मंदिर से खाली झोली जा ही नहीं सकते हैं. सिर्फ स्थानीय भक्त ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से भक्त आकर बाबा का आशीर्वाद लेते हैं. मंदिर एक नहीं, कई चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. प्रचलित किंवदंती की मानें तो 1879 में जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था, तब मंदिर में एक छोटा सा शिवालय था.
हर मनोकामना को करते हैं पूरा
स्थानीय लोग मंदिर में पूजा-पाठ करने आते थे. अब वक्त लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन की पत्नी ने पूजने का कारण पूछा तो बताया गया कि बाबा हर मनोकामना को पूरा करते हैं. उस समय अंग्रेजों ने अफगानिस्तान पर आक्रमण कर रखा था और कर्नल मार्टिन ने आगर-मालवा को युद्ध की छावनी में तब्दील कर रखा था. उन्हें लंबे समय तक युद्ध पर रहना पड़ता था.
लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन की पत्नी ने शुरू की शिव अराधना
एक समय ऐसा आया जब लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने पत्नी को खत लिखना बंद कर दिया और घबराई पत्नी ने भगवान शिव की अराधना शुरू की. लंबे समय बाद लौटे लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने बताया कि युद्ध के क्षेत्र में वह मरते-मरते बचे और किसी साधु-बाबा ने आकर उनकी मदद की. यह सुनकर दोनों को विश्वास हुआ कि बचाने वाले बैजनाथ बाबा ही थे. पत्नी के कहने पर लेफ्टिनेंट कर्नल मार्टिन ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया.
रखरखाव और बनाने का काम दोनों अंग्रेजों ने कराया
यह देश का पहला मंदिर बना, जिसका रखरखाव और बनाने का काम दोनों अंग्रेजों ने कराया और वह जब तक यहां रहे, बाबा बैजनाथ की पूजा करते रहे. स्थानीय मान्यता की मानें तो मंदिर में वकील जयनारायण उपाध्याय उर्फ बापजी के साथ भी चमत्कार हुआ. वकील जयनारायण उपाध्याय को केस की पैरवी पर जाना था, लेकिन वे शिव की भक्ति में ऐसे लीन हुए कि कोर्ट जाना भूल गए. जब वे कोर्ट पहुंचे तब तक मुकदमा जीत चुके थे. माना जाता है कि खुद बाबा बैजनाथ उनकी जगह केस लड़ने गए थे.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें


