बेहद पॉवरफुल होता है पुखराज, इस तरीके से करें धारण, बदल जाएगी किस्मत, जानें ज्योतिषी की सलाह
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Pukhraj Gemstone: ज्योतिष शास्त्र में रत्न शास्त्र का विशेष महत्व होता है. रत्न शास्त्र के मुताबिक लोग अपने हाथों में अनेक प्रकार के रत्न की अंगूठी धारण करते हैं. इन्हीं में से एक रत्न पुखराज होता है. जो बेहद ही शक्तिशाली रत्न माना जाता है. जिसे धारण करने के कई फायदे भी बताए गए हैं. तो चलिए विस्तार से समझते हैं.
अक्सर आपने देखा होगा लोग अपने हाथों में कई तरह के रत्न की अंगूठी धारण करते हैं. इन्हीं में से एक रत्न पुखराज भी होता है. जिसे धारण करने से कई तरह के शुभ परिणाम भी देखने को मिलते हैं. पुखराज बृहस्पति ग्रह का रत्न माना जाता है. और देवगुरु बृहस्पति ज्ञान के कारक ग्रह माने जाते हैं.

ऐसी स्थिति में अगर आप रत्न शास्त्र के अनुसार पुखराज रत्न की अंगूठी धारण करते हैं तो इससे कई तरह शुभ फल की प्राप्ति भी होती है. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि पुखराज रत्न धारण करने से धन समृद्धि में वृद्धि होती है. लेकिन अगर इसे सही तरीके से धारण नहीं किया गया है तो इसका अशुभ परिणाम भी मिलता है. साथ ही ज्योतिष सलाह के अनुसार ही इस रत्न को धारण करना चाहिए.

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक पुखराज को सोने अथवा पीतल की अंगूठी में धारण करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस अंगूठी को धारण करने से मानसिक शांति आत्मविश्वास में वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
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पुखराज की अंगूठी धारण करते समय इस बात का विशेष ध्यान रहे कि यह पीला हल्का नारंगी रंगों में ही रहे. पुखराज की अंगूठी धारण करने से बृहस्पति ग्रह भी मजबूत होते हैं. साथ ही मुख्य रूप से धनु और मीन राशि के जातक के लिए यह शुभ भी माना जाता है .

पुखराज की अंगूठी धारण करने से वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनी रहती है साथ ही संतान सुख में भी मदद मिलता है. तो दूसरी तरफ वृषभ राशि, कन्या राशि, मिथुन राशि और तुला राशि के जातक को इसे धारण करने से पहले ज्योतिष से सलाह जरूर लेनी चाहिए.

पुखराज की अंगूठी सप्ताह के किसी भी दिन नहीं धारण करना चाहिए. ज्योतिषी सलाह के अनुसार इसे बृहस्पतिवार के दिन ही धारण करना शुभ माना जाता है. अंगूठी को धारण करने से पहले इसे दूध और गंगाजल शहद और तुलसी के पत्तों से शुद्ध करना चाहिए.

बृहस्पतिवार के दिन अंगूठी धारण करते वक्त बृहस्पति मंत्र का जाप करना चाहिए. पुखराज की अंगूठी हमेशा दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में ही धारण करना चाहिए. सूर्योदय के समय यह अंगूठी धारण करना शुभ माना जाता है.


