बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा? जानें धार्मिक-वैज्ञानिक कारण

बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा? जानें धार्मिक-वैज्ञानिक कारण

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बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा? जानें कारण

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Basoda pe Chulha jalana: बासोड़ा या शीतला अष्टमी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को है. इस दिन शीतला माता की पूजा करते है, लेकिन खास बात यह है कि पूरे दिन चूल्हा नहीं जलाते हैं. आपके मन में सवाल होगा कि बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाते? आइए जानते हैं इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण.

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बासोड़ा या शीतला अष्टमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाते?

Basoda pe Chulha jalana: बासोड़ा को शीतला अष्टमी के नाम से भी जानते हैं. हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बासोड़ा या शीतला अष्टमी मनाई जाती है. इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है, लोग निरोगी रहते हैं. शीतला अष्टमी या बासोड़ा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं शीतला अष्टमी या बासोड़ा से जुड़ी इस मान्यता के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?

शीतला अष्टमी या बासोड़ा कब है?

दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 मार्च को 1 बजकर 54 एएम से होगा और यह 12 मार्च को 04:19 ए एम तक रहेगा. उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी या बासोड़ा का पर्व 11 मार्च दिन बुधवार को है.

बासोड़ा पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा?

बासोड़ा यानि शीतला अष्टमी के दिन लोग अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाते हैं. इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और उनको बासी भोजन का भोग लगाते हैं. बासोड़ा का भोग एक दिन पहले यानि सप्तमी के दिन ही बना लेते हैं, फिर उसे ठंडा यानि बासी भोग अगले दिन अष्टमी को शीतला माता को अर्पित करते हैं.

कहा जाता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन ​प्रिय है. देवी शीतला को शीतलता और आरोग्य प्रदान करने वाली देवी कहा जाता है. उनको जो भोग लगाते हैं, वहीं पूरा परिवार खाता है. उस दिन चूल्हा नहीं जलाते हैं क्योंकि ऐसा करने से शीतला माता नाराज हो सकती हैं.

वैज्ञानिक कारण यह है कि बासोड़ा के समय मौसम बदल रहा होता है. सर्दी खत्म हो रही होती है और गर्मी शुरू हो रही होती है. यह मौसम के बदलाव का समय है. इस समय में चेचक, खसरा या अन्य संक्रामक त्वचा रोगों के बढ़ने की आशंका रहती है, इसके अलावा इस मौसम में लोगों की पाचन शक्ति पर भी प्रभाव पड़ता है, सर्दी में व्यक्ति गरमा गरम और अधिक भोजन करता है, शरीर उसे आसानी से पचा लेता है, लेकिन गर्मी के समय में पाचन शक्ति वैसी नहीं रहती है और न ही व्यक्ति गरमा गरम भोजन कर पाता है.

इस समय में अपच, गैस, बदहजमी की समस्या भी लोगों को परेशान करती है. इस वजह से इस समय में ठंडा और संतुलित भोजन करने की सलाह दी जाती है ताकि पाचन तंत्र सही रहे. व्यक्ति भी निरोगी रहें.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

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