बार-बार नुकसान, बुरे सपने और देरी से शादी? यह हो सकता है कालसर्प दोष का असर, जानिए बचाव के उपाय
क्या होता है कालसर्प दोष?
जब किसी की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं तो वहां कालसर्प दोष बनता है. यह दोष कुंडली में किसी विशेष ग्रह की स्थिति के कारण नहीं, बल्कि सभी ग्रहों के एक साथ एक सीमा में आ जाने से बनता है. कुल 12 प्रकार के कालसर्प योग होते हैं – जैसे अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापदम, तक्षक, कर्कोटक, शंखनाद, पातक, विषधर, शेषनाग. इन सभी का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है, लेकिन सबका आधार एक ही होता है – राहु और केतु के बीच ग्रहों का फंस जाना.
-बार-बार आर्थिक नुकसान होता है
-नींद में सांप दिखते हैं या मृत्यु से जुड़े डरावने सपने आते हैं
-किसी भी काम में जल्दी सफलता नहीं मिलती, खासकर 42 साल की उम्र से पहले
-विवाह में देरी होती है या रिश्तों में तनाव बना रहता है
-कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझाव बढ़ता है
-शरीर में थकान, चिंता, बेचैनी और नींद की कमी बनी रहती है
-अचानक शत्रुओं की संख्या बढ़ जाती है
इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ये भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकते हैं.
कालसर्प योग मुख्य रूप से राहु की दशा या उपदशा में ज्यादा प्रभावी होता है. इसके अलावा जब राहु या केतु गोचर में अशुभ भावों में आ जाते हैं, तब भी इसका असर तेज हो जाता है.
कालसर्प दोष को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है. इसके लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं:
-शनिवार को बहते जल में कोयला प्रवाहित करें
-भगवान शिव या विष्णु की नियमित पूजा करें
-नाग पंचमी या श्रावण मास में विशेष पूजा करवाएं
-चांदी की नाग की आकृति वाली अंगूठी दाहिने हाथ में पहनें
-कुंडली का विशेष अध्ययन कर योग्य पंडित से पूजा करवाएं


