पुरानी लकड़ी और गलत मुहूर्त बन सकते हैं संकट! घर बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान, जानिए निर्माण से पहले जरूरी वास्तु नियम
Vastu Tips For Construction: घर बनाना सिर्फ ईंट-पत्थर जोड़ने का काम नहीं होता, यह एक सपना गढ़ने जैसा होता है. हर परिवार चाहता है कि उसके नए घर में खुशियां बसें, बरकत रहे और अनचाही परेशानियां दरवाजे तक भी न आएं. अक्सर लोग नक्शा, बजट और लोकेशन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन निर्माण शुरू करने से पहले कुछ पारंपरिक बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. भारतीय परंपरा में वास्तुशास्त्र को सिर्फ मान्यता नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा माना गया है. माना जाता है कि अगर घर की शुरुआत सही दिशा और सही नियमों के साथ हो, तो उसका सकारात्मक असर सालों तक परिवार पर दिखाई देता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
सही दिशा से शुरू करें नींव की तैयारी
घर की मजबूती उसकी नींव से तय होती है. वास्तुशास्त्र के अनुसार, नींव की खुदाई और भूमि पूजन की शुरुआत ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा से करना शुभ माना जाता है. यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग निर्माण शुरू करने से पहले पंडित से मुहूर्त निकलवाते हैं और ईशान कोण से पहली खुदाई करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
कई वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि शुरुआत दक्षिण-पश्चिम दिशा से कर दी जाए, तो काम में रुकावटें आ सकती हैं. इसलिए दिशा का चयन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया निर्णय होना चाहिए.
शुभ मुहूर्त में रखें पहली ईंट
शिलान्यास का महत्व
नींव में रखी जाने वाली पहली ईंट को शिलान्यास कहा जाता है. यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूरे निर्माण कार्य की ऊर्जा तय करने वाला क्षण माना जाता है. कोशिश करें कि शिलान्यास शुभ दिन और शुभ लग्न में ही किया जाए. ज्योतिष के अनुसार, जिस लग्न में नींव रखी जाए वह आठवीं राशि से संबंधित न हो. अक्सर देखा गया है कि जल्दबाजी में बिना मुहूर्त के काम शुरू कर दिया जाता है और बाद में निर्माण में बार-बार अड़चनें आती हैं. ऐसे में थोड़ा धैर्य रखकर सही समय का इंतजार करना बेहतर माना जाता है.
नई सामग्री का करें उपयोग
घर बनवाते समय पुरानी लकड़ी, लोहे या ईंटों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. कई लोग खर्च बचाने के लिए पुराने मकान की सामग्री नए घर में लगा लेते हैं. वास्तु के अनुसार यह शुभ नहीं माना जाता. मान्यता है कि पुरानी वस्तुओं में पिछली ऊर्जा भी जुड़ी होती है, जो नए घर के वातावरण को प्रभावित कर सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कोशिश करें निर्माण में एक ही प्रकार की लकड़ी का उपयोग हो. अलग-अलग किस्म की लकड़ियों का मिश्रण वास्तु दृष्टि से संतुलित नहीं माना जाता.
नींव भरते समय करें यह उपाय
नींव भरते समय शहद से भरा एक छोटा पात्र रखने की परंपरा भी कई जगहों पर प्रचलित है. कहा जाता है कि इससे निर्माण कार्य में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और घर में मधुरता बनी रहती है. हालांकि यह आस्था का विषय है, लेकिन कई परिवार इसे शुभ संकेत मानकर अपनाते हैं. यदि निर्माण स्थल पर चींटियां दिखाई दें तो उन्हें आटा या आटा-शक्कर मिलाकर खिलाना भी शुभ माना गया है. इसे जीवों के प्रति करुणा और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है.
निर्माण कार्य बीच में न रोकें
वास्तुशास्त्र के अनुसार, एक बार घर का निर्माण शुरू हो जाए तो उसे लंबे समय तक अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए. मान्यता है कि अधूरा निर्माण नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है. कई उदाहरणों में देखा गया है कि वर्षों तक अधूरे पड़े मकान विवाद या आर्थिक परेशानी का कारण बन जाते हैं. इसलिए बेहतर है कि निर्माण शुरू करने से पहले पूरा बजट और योजना स्पष्ट हो, ताकि काम बीच में न रुके.
अंततः, वास्तु नियमों को अंधविश्वास या डर की नजर से देखने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण से समझना चाहिए. यदि इन बातों का पालन करते हुए वैज्ञानिक सोच और सही योजना को साथ रखा जाए, तो घर सचमुच सुख-शांति का केंद्र बन सकता है.


