न रत्न, न यंत्र और न ही रुद्राक्ष…बस इस देव की स्तुति पाठ करें शुरू, जीवन में होंगे हैरान कर देने वाले लाभ!

न रत्न, न यंत्र और न ही रुद्राक्ष…बस इस देव की स्तुति पाठ करें शुरू, जीवन में होंगे हैरान कर देने वाले लाभ!

Natraj Stuti lyrics in Hindi: देवों के देव महादेव की महिमा कौन नहीं जानता है. उनको शिव, शंकर, भोले, चन्द्रशेखर, जटाधारी और नागनाथ समेत कई नाम से जाना जाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं शिवजी का एक नाम नटराज भी है. जी हां, भगवान शिव के आनंदमय तांडव को नटराज स्वरूप माना गया है. नटराज को नृत्य का देवता भी कहा जाता है. नटराज दो शब्दों से बना है, पहला नट अर्थात कला व दूसरा राज. यह भगवान शिव की संपूर्ण कलाओं को दर्शाता हैं.

शास्त्रों में भगवान शिव के नटराज स्वरूप का वर्णन मिलता है. यह दर्शाता कि ब्रह्मांड में जीवन, उसकी गति व कंपन सबकुछ भगवान शिव में ही निहित है. धार्मिक मान्यता है कि नटराज स्तुति पाठ करने वाले जातकों के संकट दूर होते हैं और सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं. अब सवाल है कि आखिर नटराज स्तुति पाठ का महत्व क्या है? कैसे करें नटराज स्तुति का पाठ? इस बारे में News18 को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री.

नटराज स्तुति पाठ का महत्व

ज्योतिषाचार्य की मानें तो, शिव तांडव के दो रूप हैं. पहला रुद्र तांडव दूसरा आनंद तांडव. शिव के रुद्र तांडव से सृष्टि का विनाश होता है, जबकि उनके आनंदमय तांडव से सृष्टि अस्तित्व में आई है. नृत्य कलाकार नटराज को अपना भगवान मानते हैं. अपनी कला का प्रदर्शन करने से पहले कलाकार नटराज की स्तुति करते हैं और प्रणाम करते हैं. शास्त्रों में नटराज स्तुति के अनेक लाभ बताए गए हैं. कहते हैं कि जो लोग नटराज स्तुति पाठ करते हैं उन पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. इसके जाप से जीवन में आनंद बना रहता है.

कैसे करें नटराज स्तुति पाठ

नटराज स्तुति पाठ का जाप सुबह स्नान करने के बाद नटराज की मूर्ति के समक्ष बैठकर करना चाहिए. नटराज स्तुति पाठ सोमवार को पढ़ना बेहद उत्तम रहता है, क्योंकि सोमवार भगवान शिव का दिन होता है. सभी लोग नटराज स्तुति पाठ करके जीवन को सुखमय बना सकते हैं, लेकिन कला से जुड़े लोगों को रोजाना इस पाठ का जाप करना चाहिए.

।।संपूर्ण नटराज स्तुति पाठ।।

सत सृष्टि तांडव रचयिता
नटराज राज नमो नमः…
हेआद्य गुरु शंकर पिता
नटराज राज नमो नमः…

गंभीर नाद मृदंगना धबके उरे ब्रह्माडना
नित होत नाद प्रचंडना
नटराज राज नमो नमः…

शिर ज्ञान गंगा चंद्रमा चिद्ब्रह्म ज्योति ललाट मां
विषनाग माला कंठ मां
नटराज राज नमो नमः…

तवशक्ति वामांगे स्थिता हे चंद्रिका अपराजिता
चहु वेद गाए संहिता

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Tags: Astrology, Dharma Aastha, Lord Shiva

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