नाखूनों पर दिखे ये निशान तो समझिए बदलने वाली है तकदीर! तर्जनी से कनिष्ठा तक… हर उंगली देती है सफलता और स्वभाव का संकेत

नाखूनों पर दिखे ये निशान तो समझिए बदलने वाली है तकदीर! तर्जनी से कनिष्ठा तक… हर उंगली देती है सफलता और स्वभाव का संकेत

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Samudrik Shastra: कभी आपने अपने हाथों को गौर से देखा है? सिर्फ रेखाएं ही नहीं, उंगलियों की लंबाई, बनावट और नाखूनों के छोटे-छोटे निशान भी आपके व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में बहुत कुछ कह सकते हैं. भारतीय परंपरा में सामुद्रिक शास्त्र को शरीर-पठन की एक रोचक विधा माना जाता है, जिसमें चेहरे से लेकर पैरों तक हर अंग के संकेतों को जीवन से जोड़ा गया है. खास बात यह है कि हाथों पर मौजूद ये संकेत हर किसी में अलग होते हैं-और यही अलगपन भविष्य और स्वभाव के संकेत माने जाते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

उंगलियों की बनावट से व्यक्तित्व के संकेत सामुद्रिक मान्यताओं के अनुसार उंगलियों की मोटाई, लंबाई और सीधापन व्यक्ति के स्वभाव का संकेत देती है. जिन लोगों की उंगलियां गठीली और चिकनी दिखती हैं, उन्हें समझदार और व्यवहारिक माना जाता है. ऐसे लोग किसी भी काम में गहराई से उतरते हैं और सामाजिक गतिविधियों में भी आगे रहते हैं. इसके उलट, बहुत पतली या ढीली बनावट वाली उंगलियां उतावलापन दिखाती हैं. ऐसे लोग जल्दी निर्णय लेते हैं, लेकिन अक्सर अधूरे छोड़ देते हैं. आसपास देखने पर भी ऐसे उदाहरण मिल जाते हैं-कई लोग नए प्रोजेक्ट उत्साह से शुरू करते हैं, पर लगातारता बनाए रखना उनके लिए मुश्किल होता है.

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उंगलियां और ग्रहों का संबंध हर उंगली का अलग प्रभाव परंपरागत मान्यता के अनुसार हाथ की हर उंगली किसी ग्रह से जुड़ी मानी जाती है- -तर्जनी: गुरु का प्रभाव -मध्यमा: शनि -अनामिका: सूर्य -कनिष्ठा: बुध इसी वजह से उंगलियों की लंबाई-छोटाई को व्यक्ति के महत्वाकांक्षा, अनुशासन, प्रसिद्धि और बुद्धि से जोड़ा जाता है.

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तर्जनी और मध्यमा से जुड़े संकेत नेतृत्व और जिम्मेदारी का संकेत अगर किसी व्यक्ति की तर्जनी उंगली मध्यमा के बराबर या उससे लंबी दिखे, तो उसे नेतृत्वप्रिय माना जाता है. ऐसे लोग अधिकार और पहचान पाने की इच्छा रखते हैं. वहीं छोटी तर्जनी शांत स्वभाव का संकेत मानी जाती है, लेकिन ऐसे लोग जिम्मेदारी लेने से हिचकते हैं. मध्यमा उंगली लंबी हो तो व्यक्ति गंभीर और एकांतप्रिय माना जाता है. ऐसे लोग सोच-विचार में डूबे रहते हैं और कई बार आध्यात्मिक या गूढ़ विषयों में रुचि लेते हैं. वहीं छोटी मध्यमा जल्दबाजी और अस्थिरता का संकेत मानी जाती है.

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अनामिका और कनिष्ठा के रहस्य प्रसिद्धि, कला और बुद्धि अनामिका उंगली को सूर्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी लंबाई को यश और रचनात्मकता से जोड़ा जाता है. जिनकी अनामिका लंबी होती है, उन्हें कला, लेखन या प्रदर्शन से जुड़ी रुचियां होती हैं. बहुत लंबी अनामिका धन और प्रतिष्ठा की चाह का संकेत मानी जाती है. कनिष्ठा उंगली बुद्धि और संवाद क्षमता का प्रतीक मानी जाती है. लंबी कनिष्ठा वाले लोग चतुर और प्रभावशाली वक्ता माने जाते हैं. छोटी कनिष्ठा आत्मविश्वास की कमी और कामकाज में बाधाओं से जोड़ी जाती है.

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नाखूनों के निशान क्या कहते हैं सफेद और काले दाग के संकेत नाखूनों पर दिखने वाले छोटे सफेद या काले धब्बों को भी सामुद्रिक शास्त्र में संकेत माना गया है. -तर्जनी पर सफेद दाग: सम्मान या उपलब्धि -तर्जनी पर काला दाग: पहचान में बाधा -मध्यमा पर सफेद दाग: यात्रा या अवसर -मध्यमा पर काला दाग: मन में भय या चिंता इसी तरह अनामिका पर सफेद दाग श्रद्धा और सामाजिक सम्मान का संकेत माना जाता है, जबकि काला दाग आलोचना या असफलता का. कनिष्ठा पर सफेद दाग विश्वास और लाभ से जोड़ा जाता है, जबकि काला दाग कामकाज में हानि का संकेत माना जाता है.

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अंगूठे के निशान और निजी जीवन अंगूठा इच्छा-शक्ति और संबंधों का प्रतीक माना जाता है. अंगूठे के नाखून पर सफेद दाग प्रेम और भावनात्मक संतोष से जोड़ा जाता है. वहीं काला निशान संबंधों या कामकाज में चुनौतियों का संकेत माना जाता है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि नाखूनों पर निशान स्वास्थ्य या पोषण से जुड़े कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह भाग्य से जोड़कर देखना जरूरी नहीं है.

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बदलती सोच में भी कायम है विश्वास आज के वैज्ञानिक दौर में भी सामुद्रिक शास्त्र जैसी परंपरागत मान्यताएं लोगों को आकर्षित करती हैं. कई लोग इसे आत्म-विश्लेषण का एक प्रतीकात्मक तरीका मानते हैं अपने स्वभाव और आदतों को समझने का. हाथों की बनावट को देखकर व्यक्तित्व समझने का यह तरीका भले वैज्ञानिक प्रमाणों से परे हो, लेकिन सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से लोगों के लिए रोचक बना हुआ है. शायद यही वजह है कि जब भी कोई अपनी उंगलियों या नाखूनों को ध्यान से देखता है, तो मन में कहीं न कहीं यह सवाल जरूर उठता है-क्या सचमुच हमारी किस्मत हमारी उंगलियों में लिखी है?

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