नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी क्या बताती है? इस बार किस पर आ रही माता रानी?

नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी क्या बताती है? इस बार किस पर आ रही माता रानी?

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि आते ही एक सवाल हर साल लोगों के मन में हलचल मचा देता है इस बार मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आ रही हैं? यह सिर्फ धार्मिक जिज्ञासा नहीं, बल्कि ज्योतिषीय संकेतों को समझने की एक पुरानी परंपरा भी है. घर-घर में घटस्थापना की तैयारी के बीच लोग यह जानने को उत्सुक रहते हैं कि माता का आगमन और प्रस्थान किस दिशा की ओर इशारा कर रहा है. कहीं यह आने वाले समय की चुनौतियों का संकेत है या फिर समृद्धि का संदेश? यही रहस्य नवरात्रि को और भी खास बना देता है. दिलचस्प बात यह है कि ये सवारी केवल मान्यता नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों और वारों के संयोजन से जुड़ी ज्योतिषीय गणना का हिस्सा मानी जाती है.

नवरात्रि और ज्योतिष का गहरा संबंध
चैत्र नवरात्रि सिर्फ भक्ति और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि इसका एक मजबूत ज्योतिषीय पक्ष भी है. नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग रूपों की आराधना के साथ-साथ प्रकृति, समय और ग्रहों की चाल को भी समझने की कोशिश की जाती है. ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि माता की सवारी उस वर्ष के ऊर्जा संतुलन का प्रतीक होती है.

कैसे तय होती है माता की सवारी?
शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत जिस दिन यानी वार से होती है, उसी के आधार पर माता के आगमन का वाहन निर्धारित किया जाता है. वहीं, नवरात्रि के अंतिम दिन के वार से प्रस्थान की सवारी तय होती है. यह नियम सदियों से लोक परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है.

2026 में क्या कहता है ज्योतिषीय गणित?
साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से हो रही है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता का आगमन पालकी या डोली में माना जाता है. पालकी का संकेत थोड़ा संवेदनशील माना जाता है यह समाज में बदलाव, हल्की अस्थिरता या भावनात्मक उतार-चढ़ाव की ओर इशारा कर सकता है. हालांकि, इसे आध्यात्मिक जागरण और आत्मचिंतन के लिए भी एक उपयुक्त समय माना जाता है.

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प्रस्थान का संकेत क्या कहता है?
इस वर्ष नवरात्रि का समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा. परंपरा के अनुसार शुक्रवार को समाप्त होने पर माता का प्रस्थान हाथी पर माना जाता है. ज्योतिष में हाथी को बेहद शुभ संकेत माना जाता है यह समृद्धि, स्थिरता और अच्छी वर्षा का प्रतीक है. इसका अर्थ यह निकाला जाता है कि शुरुआती चुनौतियों के बाद परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं.

अलग-अलग वाहनों के ज्योतिषीय अर्थ
ज्योतिष शास्त्र में माता की सवारी को संकेतों की भाषा माना जाता है.
हाथी जहां सुख-समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक है, वहीं घोड़ा तेज बदलाव और उथल-पुथल को दर्शाता है. नाव को संतुलन और सामूहिक प्रगति का संकेत माना जाता है, जबकि पालकी सामाजिक और मानसिक परिवर्तनों की ओर इशारा करती है.

आम जीवन में इन संकेतों का असर
अगर इसे रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर देखें, तो जैसे कभी-कभी साल की शुरुआत थोड़ी चुनौतीपूर्ण होती है लेकिन धीरे-धीरे हालात सुधर जाते हैं ठीक वैसे ही पालकी से आगमन और हाथी से प्रस्थान का योग भी कुछ ऐसा ही संदेश देता है. यानी शुरुआत में धैर्य और संयम जरूरी रहेगा, लेकिन अंत में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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