क्यों है कन्फ्यूजन
अमावस्या तिथि का खेल: दीवाली कार्तिक अमावस्या पर मनाई जाती है. इस बार ये तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे तक चलेगी. यानी, तिथि का ज्यादातर हिस्सा 21 को है. यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को कंफ्यूजन है कि दिवाली 21 तारीख की है.
कन्फ्यूजन कहां से फैला? ऑनलाइन पंचांग्स में थोड़े-बहुत डिफरेंस, सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स, और कुछ रीजनल वरिएशंस. साउथ इंडिया में कभी-कभी नरकासुर वध की वजह से एक दिन पहले मनाते हैं, लेकिन इस बार मुख्य बहस नॉर्थ vs साउथ नहीं, बल्कि तिथि स्पैन की है.
त्योहारों की डेट्स पर कन्फ्यूजन क्यों होता है? बेसिक रीजन
हिंदू कैलेंडर चंद्र-सौर (lunar-solar) है, यानी चांद और सूरज दोनों पर बेस्ड. ग्रेगोरियन कैलेंडर (हमारा आम महीना) से मैच नहीं करता, तो हर साल डेट्स शिफ्ट हो जाती हैं. लेकिन कन्फ्यूजन की मुख्य वजहें:
अब पहले से ज्यादा कन्फ्यूजन क्यों?
क्षेत्रीय तिथियों के अनुसार अंतर पहले भी होता था. लेकिन पहले ऐसा कंफ्यूजन कम था. क्योंकि पहले गांव-शहर में लोकल पंडित या फैमिली ट्रेडिशन फॉलो करते थे. एक ही आवाज होती थी, जो मंदिर के पंड़ित कह देते थे, वहीं मान लिया जाता था, कोई डाउट नहीं. लेकिन आज? इंटरनेट ने सब उलट-पुलट कर दिया!
– इंफॉर्मेशन ओवरलोड: गूगल पर सर्च करो, तो 10 पंचांग्स मिलेंगे – एक कहेगा 20, दूसरा 21. सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स और इंस्टा रील्स से फेक या आउटडेटेड इंफो वायरल हो जाती. पहले न्यूजपेपर या रेडियो से एक ही सोर्स मिलता था.
– ग्लोबल माइग्रेशन और टाइम जोन: NRIs या ट्रैवलर्स के लिए प्रॉब्लम. इंडिया में सुबह 6 बजे तिथि खत्म, लेकिन अमेरिका में अभी रात है – तो डेट शिफ्ट हो जाती. पहले लोग लोकल रहते थे, अब वर्ल्डवाइड फैमिलीज.
– अर्बन लाइफस्टाइल: पहले कम्युनिटी में सब लोग त्योहार एक साथ मिलकर मनाते थे, पर अब सबकी अपनी पसंद है.
जानीमानी ज्योतिषाचार्य डॉ. मधुप्रिया बताती हैं, ‘भारतीय पंचांग सूर्य उदय की तिथि के अनुसार ही काम चलता है. ऐसे में अक्सर ये कंफ्यूजन तब होता है, जब कोई तिथि 1 नहीं बल्कि 2 दिन तक चले. पर ऐसे में भारतीय पंचांग के अनुसार यही नियम लागू होता है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, त्योहार उसी तिथि में माना जाता है. लेकिन अब लोग पंचांग की बजाए इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया पर चीजें सुनकर कंफ्यूजन में रहते हैं. इंस्टागाम पर अक्सर लोग व्यूज पाने के लिए भ्रामक वीडियो भी डाल देते हैं. उसी से ये भ्रम और भी बढ़ जाता है. दिवाली में काली और लक्ष्मी की पूजा होती है. दिवाली की पूजा शाम में ही होती है. प्रदोष भी 20 तारीख को ही पड़ रहा है, इसलिए उसी तिथि के अनुसार हमें त्योहार मनाना चाहिए.’